बेटे-बहू की उपेक्षा से उभरी माता-पिता के मन की व्यथा - rajasthani cinema

Breaking

rajasthani cinema

आपके पास भी खबर है तो मेल करें. rajasthanicinema@gmail.com

STAY WITH US

Post Top Ad

Post Top Ad

Saturday, December 31, 2016

बेटे-बहू की उपेक्षा से उभरी माता-पिता के मन की व्यथा





रवींद्र मंच के फ्राइटे थिएटर में नाटक चौबीस घंटे का मंचन
जयपुर। जिन मां-बाप ने बड़ी हसरत से बच्चे को पाल-पोसकर बड़ा किया, उसे पढ़ाया-लिखाया और शादी की। वही बेटा अपने मां-बाप को अपने घर में 24 घंटे भी नहीं रख सका। बेटे और बहू के लिए उसके मां-बाप ही बोझ बन गए। रवींद्र मंच के फ्राइडे थिएटर में शिवाजी फिल्म्स की ओर से प्रस्तुत नाटक चौबीस घंटे ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आजकल बच्चे अपने माता-पिता के प्रति इतने संवेदनहीन क्यों होते जा रहे हैं।
रवींद्र मंच के फ्राइडे थिएटर में शिवाजी फिल्म्स की ओर से शिवराज गूजर द्वारा निर्देशित और संतोष कुमार निर्मल द्वारा लिखित नाटक 24 घंटे में इसी समस्या पर प्रकाश डाला गया।

नाटक का कथानक यह है कि भरतपुर में रह रहे अशोक के माता-पिता घनश्याम और शांति जब मुंबई में रह रहे अपने बेटे अशोक और बहू सुनीता के पास पहुंचते हैं, तो वे घबरा जाते हैं। उन्हें यह चिंता होती है कि उन्हें रखेंगे कहां। वे सोचते हैं कि एक कमरे के फ्लैट में इतनी जगह नहीं है कि वे किसी को एक दिन भी रख सकें। दोनों आपस में अपने माता-पिता को किसी धर्मशाला में ठहराने की बात करते हैं। इस बात को उनके मां-बाप सुन लेते हैं। वे अशोक को धिक्कारते हुए कहते हैं कि ऐसा करने की जरूरत नहीं है, क्या वे इतने गए-गुजरे हैं कि उन्हें किसी धर्मशाला में ठहराया जाए। वे तो उनके आने से ही घबरा गए। कम से कम उनसे पूछ तो लिया होता कि वे किस तरह के सफर पर निकले हैं। मां-बाप बताते हैं कि वे तो तीर्थयात्रा पर निकले हैं। बीच में मुंबई पड़ा तो बेटे-बहू और पोते से मिलने  मिलने के मोह में यहां आ गए। अगले ही दिन उनकी ट्रेन है, वह तो वैसे ही चले जाएंगे। वह यहां रुकने नहीं आए हैं इसलिए परेशान नहीं हों। यदि उन्हें पहले से पता होता कि उनका बेटा-बहू उन्हें 24 घंटे भी नहीं रख पाएंगे, तो वे यहां आते ही नहीं।
 अशोक-सुनीता अपनी गलती पर पछताते हैं। दोनों उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं, पर वे चले जाते हैं। उनके जाने के बाद अशोक अपने को धिक्कारता है। नाटक में सभी कलाकारों ने अपने भावपूर्ण अभिनय से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। नाटक में मुख्य भूमिकाओं में सिकंदर चौहान, राशि शर्मा, अनिल सैनी, ज्योति शर्मा, अनुराग गूजर, आदम और शिवराज गूजर थे। सह-निर्देशक प्रमोद आर्य व देव गूजर थे तथा मंच संयोजन घनश्याम जांगिड़ का था। प्रकाश व्यवस्था नरेंद्र बब्बल ने संभाली तथा संगीत प्रियंका गुप्ता ने दिया। कलाकारों का मेकअप पंकज सैन ने किया।


Post Top Ad