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Showing posts from April, 2018

आपणी पहली 3डी फिल्म में जलवे बिखेरेंगी यह हीरोइन

जयपुर। अब राजस्थानी सिनेमा भी हाईटेक हो रहा है। जल्द ही हम विशेष चश्मा लगाकर अपनी फिल्म थ्री डी में देख पाएंगे। हमारी पहली थ्रीडी फिल्म होगी चिरमी, जिसमें नेहा श्री सिंह महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगी। इस फिल्म की हाल ही मुंबई में घोषणा हुई। इसके निर्माता विजिथ नांबियार हैं और निर्देशन करेंगे अशोकन पीके।

नेहा श्री सिंह राजस्थानी सिनेमा की जानी-पहचानी हीरोइन हैं। ये माटीका लाल मीणा गुर्जर, भंवरी, हुकुम, तांडव और कजराली-नखराली जैसी राजस्थानी फिल्मों में अपनी अदाकारी के जलवे दिखा चुकी हैं। नेहा श्री राजस्थानी फिल्मों की संभवत: एकमात्र ऐसी हीरोइन हैं, जिसने भोजपुरी मूवीज में भी नाम कमाया है। आज ये वहां की टॉप टेन हीरोइन्स में शुमार की जाती हैं।

यह राजस्थानी फिल्म अब हैदराबाद में होगी रिलीज

इंद्रराम कृष्णा टाकीज में रोजाना सुबह 11:30 बजे वाले शो में दिखाई जाएगी पक्की हीरोगिरीजयपुर । राजस्थानी फिल्म पक्की हीरोगिरी अब हैदराबाद में रह रहे राजस्थानी भी देख पाएंगे। अरविंद कुमार व राखी की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म 7 जून वहां के इंद्रराम कृष्णा टाकीज में रोजाना सुबह 11:30 बजे वाले शो में दिखाई जाएगी। थ्री ब्रदर्श के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन सुनित कुमावत ने किया है।                                                                                                                                                                            CAST & CREW                                                                                                              बैनर-थ्री ब्रदर्स
निर्माता- हितेश कुमार व एम एम गुप्ता
निर्देशक-सुनित कुमावत
कार्यकारी निर्माता-जयसिंह राजपुरोहित, रामेश्वर पी वर्मा, विनोद जॉली, सतीश सुराणा, अशोक बाफना, प्रकाश रांका
सह निर्माता-पीर मोहम्मद (प्रताप), जगदीश आधा, राजेश जोशी, सुनिल हेड़ा व सुरेश निनामा
कहानी-अरविंद कुमार
कंसेप्ट-विकी राणा
डीओपी- हितेश बेलदार
स…

नहीं रहा राजस्थानी फिल्मों का यह प्रसिद्ध लेखक-गीतकार

एम .डी . सोनी
राजस्थानी सिनेमा के दूसरे दौर के सबसे लोकप्रिय और सक्रिय गीतकार तथा स्क्रिप्ट राइटर सूरज दाधीच 19 अप्रेल को अलविदा कह गए। मुंबई में गुरुवार शाम को उन्होंने अंतिम सांस ली।
दस जुलाई 1944 को चूरू में जन्मे सूरज दाधीच की परवरिश राजस्थानी नाटककार पं. मुरलीधर दाधीच की छत्रछाया में हुई। उन्हीं से राजस्थानी में लिखने की प्रेरणा मिली, तो अपने फूफा, जाने-माने लेखक और गीतकार पं. इंद्र से उन्हें सिनेमाई लेखन के गुर सीखने को मिले । मुंबई में सेंचुरी मिल में नौकरी के साथ राजस्थानी रंगमंच से जुड़ गए। राजस्थानी सिनेमा में पहली बार, 'म्हारी प्यारी चनणा' (1983) में संवाद के साथ तीन गीत लिखे। ये तीनों गीत- अरे काल़ी पील़ी बादल़ी रे..., धीरे धीरे धीरे बोल रामूड़ा..., सावण आयो रे... खू़ब प्रचलित रहे। तब से पिछले साल आई 'कंगना' तक उन्होंने 'नानीबाई को मायरो' 'बीरा बेगो आईजे रे', 'लिछमी आई आंगणै', 'बीनणी होवै तो इसी', 'वारी जाऊं बालाजी', 'म्हारा श्याम धणी दातार' और 'माटी का लाल मीणा और गुर्जर' जैसी कई हिट, लोकप्रिय, चर्चित फिल…

कार्यशाला में सीखे फिल्म लेखने के गुर

शिवाजी फिल्म्स की ओर से यूथ हॉस्टल में आयोजित हुई स्क्रिप्ट राइटिंग वर्कशॉप
जयपुर । शिवाजी फिल्म्स की ओर से रविवार को यूथ हॉस्टल में आयोजित स्क्रिप्ट राइटिंग वर्कशॉप में प्रतिभागियों ने फिल्म लेखन संबंधी अनेक गुर सीखे।
फिल्म राइटर शिवराज गुर्जर व संतोष निर्मल ने फिल्मों के थीम आईडिया, आॅनलाइन स्टोरी स्क्रीन प्ले व संवाद लेखन के बारे में बताया। प्रतिभागियों को एक सिचुएशन भी दी गई, जिसके अनुसार उन्होंने दृश्य लिखें वर्कशॉप में शोले, गर्दिश दीवार और त्रिशूल जैसी चर्चित फिल्मों के सुंदर दृश्य दिखाए गए और उन पर चर्चा की गई । कार्यक्रम के अंत में राजस्थानी फिल्मों के निमार्ता अजय तिवारी, अभिनेता श्रवण सागर और अभिनेत्री परी ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए।
प्रतिभागियों ने बताया कि उनके मन में स्क्रिप्ट राइटिंग को लेकर मन में एक होव्वा था। डर था, जो वर्कशॉप में भाग लेने के बाद खत्म हो गया। उनमें आत्म विश्वास आया है और लगने लगा है कि वो भी फिल्म की स्क्रिप्ट लिख सकते हैं।