Skip to main content

Posts

Showing posts from 2010

अईयां तो होग्यो सिनेमा को विकास

अब राजस्थानी फिल्मों को 5 लाख रुपए तक अनुदान देगी राज्य सरकार

एनसीईआरटी ने माना राजस्थानी को मातृभाषा

आठ करोड़ राजस्थानियों की भावनाओं का सम्मान, अखिल भारतीय विद्यालय शिक्षा सर्वेक्षण में पहली बार राजस्थानी शामिल

राजस्थानी फिल्म बहु म्हारी लाखां री का मुहुर्त

अभिनेता आदित्य पंचौली, वरिष्ठ निर्माता निर्देशक केसी बोकाडिय़ा व विक्की राणावत ने दिया मुहुर्त शॉट का क्लैप

राजस्थानी फिल्मों को कर मुक्त करने व अनुदान देने पर निर्णय शीघ्र : सालोदिया

हर साल संभाग स्तर पर होगा राजस्थानी फिल्म महोत्सव, साहित्य अकादमी करवाएगी आयोजन

रेखा बालड़

जन्म : जोधपुर
पहली राजस्थानी फिल्म : म्हारी आखातीज (बैनर : श्री शक्ति फिल्म्स, निर्देशक : विनोद दत्त)
अब तक : दो राजस्थानी फिल्मों (म्हारी आखातीज और दूसरी विदाई) में काम किया। बाल विवाह पर आधारित एक डॉक्यूमेंटरी फिल्म सही इरादो तथा डीडी नेशनल पर प्रसारित धारावाहिक बिज्जी की कहानियां में अभिनय। दस साल से रंगमंच पर सक्रिय। राजस्थानी गानों के कई एलबम्स में भी विभिन्न भूमिकाएं अभिनीत की। वीर तेजाजी महाराज री जीवनी में अभिनय के लिए विशेष सराहना।
विशेष : आकाशवाणी के नाटकों में कई चरित्रों को आवाज दी। पच्चीस साल से कत्थक एवं लोक नृत्य की साधना।
इन दिनों : नृत्य प्रशिक्षण दे रही हैं। साथ ही अध्यापन कार्य में व्यस्त।

महिपाल : राजस्थानी फिल्मों के पहले नायक

1942 में राजस्थानी सिनेमा रूपहले परदे पर अवतरित हुआ। पहली फिल्म थी नजराना और पहले नायक थे महिपाल।
महिपाल का जन्म 24 नवंबर 1919 को राजस्थान के जोधपुर कस्बे में हुआ। किशोरावस्था से ही वे थियेटर से जुड़ गए। वे कविताएं भी बहुत बढिय़ा लिखते थे। थियेटर करने का जुनून उन्हें मुंबई ले गया। जीपी कपूर द्वारा निर्मित राजस्थानी फिल्म नजराना को उनकी डेब्यू फिल्म माना जा सकता है। यह फिल्म राजस्थानी भाषा में बनने वाली पहली फिल्म थी। नजराना के निर्माता भले ही राजस्थान के नहीं थे, लेकिन राजस्थानी फिल्मों का हीरो बनने का मौका एक राजस्थानी को ही मिला। महिपाल ने नवरंग और पारसमणी सहित कई चर्चित हिंदी फिल्मों में भी अभिनय के कई रंग बिखेरे। जीवन के अंतिम दिनों में उन्होंने खुद को सिने जगत से बिल्कुल अलग कर लिया था। ...और 15 मई 2005 को सिनेमा के पर्दे का यह हीरो जीवन के रंगमंच से हमेशा के लिए विदा हो गया।

गोलेछा सिनेमा के इलैक्ट्रीशियन डूंगाराम सैनी सेवानिवृत्त

अपने ही घर में बेगानी राजस्थानी फिल्में

अन्य राज्यों की तुलना में बहुत पीछे, 68 साल के सफर में बस सौ का आंकड़ा पार कर पाई

दूसरी विदाई की अच्छी शुरुआत

गजेंद्र शर्मा

जन्म : कोटा, राजस्थान
पहली राजस्थानी फिल्म : दूसरी विदाई
अब तक : एक राजस्थानी फिल्म (दूसरी विदाई) में अभिनय किया। कई सालों से थिएटर पर सक्रिय। कई नुक्कड़ नाटक किए। इस दौरान विभिन्न भूमिकाओं का निर्वाह।
विशेष : तीन टेली फिल्मों (लक्ष्य-एम ऑफ स्टूडेंट, मीना और धमाल-गोलगप्पे) में अभिनय किया।
इन दिनों : अपनी पहली फिल्म दूसरी विदाई के प्रमोशन में व्यस्त।

जय-जय दशा मां

6 अगस्त को रिलीज होगी दूसरी विदाई

उदयपुर के पिक्चर पैलेस में दिखाए जाएंगे रोजाना 4 शो

राजस्थानी फिल्मों के संरक्षण की मांग

राजस्थान की कला व संस्कृति मंत्री बीना काक से मिला राजस्थानी फिल्म एसोसिएशन मुंबई का प्रतिनिधिमंडल, मंत्री के सकारात्मक रूख ने जगाई आस

श्रीमती पदमा सरगरा

परमानंद रामदेव

जन्म :जोधपुर
पहली राजस्थानी फिल्म :
जय सुंधा माता
अब तक : एक राजस्थानी फिल्म रिलीज और एक निर्माणाधीन। दस साल से रंगमंच पर सक्रिय। धारावाहिक बिज्जी का खजाना के कई एपिसोड में विभिन्न भूमिकाएं निभाईं। इस दौरान सुरेखा सीकरी जैसी सीनियर कलाकार के साथ भी काम करने का मौका मिला। कई राजस्थानी एलबम्स में भी काम किया।
इन दिनों : बाल विवाह पर बन रही अनाम फिल्म की शूटिंग में व्यस्त।

कमल चंदा

जन्म : फलोदी, जोधपुर
पहली राजस्थानी फिल्म : जय संतोषी मां
अब तक : तीन राजस्थानी फिल्मों में विभिन्न भूमिकाएं कीं। हिंदी फिल्मों में भी लगातार सक्रिय। 1998 से अभिनय के क्षेत्र में । इस दौरान अलग-अलग भूमिकाएं की और अपने अभिनय की छाप छोड़ी।
इन दिनों : सब टीवी पर चल रहे धारावाहिक पाड़ पोल में  गेस्ट अपियरेंस। कई प्रोजेक्ट्स की शूटिंग में व्यस्त।

शैली

बाल प्रतिभा
जन्म : जयपुर, राजस्थान
उम्र : 5 साल 6 माह
पिता : भरत सिसोदिया (पत्रकार)
अब तक : स्कूल में आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नृत्य प्रस्तुति। इसके अलावा नाटकों में भी अभिनय।
लक्ष्य : बड़ी होकर एक अच्छी कलाकार व नृत्यांगना बनना चाहती है शैली। इसके लिए वह नृत्य का प्रशिक्षण भी ले रही है। पिछले दिनों उसने एक अ िसंस्था द्वारा लगाई गई अभिनय की वर्कशॉप भी पूरी की है।
इन दिनों : नृत्य प्रशिक्षण ले रही है। साथ ही अपनी प्रेप की पढ़ाई भी कर रही है।

दूसरी विदाई का भव्य प्रीमियर

अपने शहर के छोरे ( निर्देशक लोकेश मैनारिया) का हौंसला बढ़ाने उमड़ी झीलों की नगरी, फिल्म के कलाकारों व टीम का सम्मान

होशियारपुर की कुड़ी, राजस्थान में छाई

पंजाब के होशियारपुर में जन्मी उपासना सिंह ने अपना फिल्मी कैरिअर राजस्थानी फिल्म बाई चाली सासरिए से शुरू किया। यह फिल्म बहुत बड़ी व्यावसायिक हिट साबित हुई और वे राजस्थानी सिनेमा की चोटी की अभिनेत्रियों में शुमार हो गईं। क्षेत्रीय फिल्मों से निकलकर उन्होंने बॉलीवुड में दस्तक दी और वहां भी सफलता ने उनका आगे बढ़कर स्वागत किया। हालांकि अब वे पूरी तरह से बॉलीवुड में रम चुकी हैं लेकिन राजस्थान के लिए उनका प्यार आज भी बरकरार है। वे दिल से मानती हैं कि उन्हें पहचान दिलाने में राजस्थानी फिल्मों की बहुत बड़ी भूमिका रही है।
शिवराज गूजर
सात साल की उम्र से ही करने लगी थी अभिनय
उपासना सिंह ने सात साल की उम्र में ही अभिनय शुरू कर दिया था। तब वे जलंधर दूरदर्शन में बाल कलाकार के रूप में काम करती थीं। उम्र के साथ अभिनय भी जवां होने लगा। स्कूल और कॉलेज के स्टेज पर विभिन्न चरित्रों को जीने के साथ ही छह साल तक कत्थक की भी विधिवत शिक्षा ली। अभिनय का यह सफर उपासना को पूना ले गया जहां तीन महीने तक भीतर के कलाकार को टैनिंग के जरिए तराशा।
पहली ही फिल्म ने रच दिया इतिहास
पूना से मुंबई लौटने के बाद बमुश्किल 7 या 8 …

इसी माह रिलीज होगी दूसरी विदाई

निर्देशक लोकश मेनारिया ने प्रेसवार्ता में दी जानकारी, नगर परिषद के सुखाडिय़ा रंगमंच पर मंगलवार दोपहर 3 बजे होगा प्रीमियर,  संभागीय आयुक्त अपर्णा अरोरा होंगी मुख्य अतिथि और निर्देशक मोहन कटारिया विशिष्ट अतिथि
उदयपुर. स्थानीय कलाकारों के अभिनय से सजी और उदयपुर में फिल्माई गई राजस्थानी फिल्म दूसरी बिदाई इसी माह रिलीज होगी। राघव पिक्चर्स एंड एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी इस फिल्म का प्रीमियर शो 6 जुलाई को दोपहर 3 बजे नगर परिषद के सुखाडिय़ा रंगमंच पर होगा।
निर्देशक लोकेश मेनारिया ने यह जानकारी रविवार को यहां प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने बताया कि प्रीमियर समारोह की मुख्य अतिथि संभागीय आयुक्त अपर्णा अरोरा होंगी और निर्देशक मोहन कटारिया विशिष्ट अतिथि होंगे। फिल्म के बारे में मेनारिया ने बताया कि इसकी शूटिंग उदयपुर क्षेत्र में ही की गई है और अधिकांश कलाकार भी स्थानीय ही हैं। इसमें 7 गाने हैं, लेकिन वे थोपे हुए नहीं बल्कि परिस्थितियों के अनुरूप हैं। फिल्म के कलाकारों में अजयकरण, मनीष कल्ला, रमेश बोहरा, रेखा बालड़, गजेंद्र शर्मा, दीपक दीक्षित, अंजना पालीवाल, नीतू कछावा, सोहन सुहालका, आशुतोष, नरेंद्र…

दूसरी विदाई का प्रीमियर 6 को

उदयपुर के नगर परिषद रंगमंच पर होगा, फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों के साथ ही पर्दें के पीछे सक्रिय रही टीम भी रहेगी मौजूद
जयपुर. राजस्थानी भाषा में बनी फिल्म दूसरी विदाई का प्रीमियर 6 जुलाई को दोपहर 3 बजे उदयपुर के नगर परिषद रंगमंच पर होगा।         निर्देशक लोकेश मेनारिया ने बताया कि इस मौके पर फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों के साथ ही पर्दें के पीछे सक्रिय रही टीम भी मौजूद रहेगी। दूसरी बिदाई विधवा विवाह पर आधारित एक पारिवारिक फिल्म है। हिन्दी में तो विधवा विवाह पर कई फिल्में बनी हैं, जिनमें पुरानी में प्रेम रोग और नई में बाबुल प्रमुख है, पर राजस्थान में ऐसे प्रयास बहुत कम हुए हैं। दूसरी विदाई इनसे थोड़ी हटकर है। इसमें विधवाओं की स्थिति दर्शाने के साथ ही कैसे उनका जीवनस्तर सुधारा जा सकता इस पर तो फोकस किया ही गया है, साथ ही इस बात को भी प्रमुखता से उभारा गया है कि हमें इस मर्दाना सोच को बदलना पड़ेगा कि आदमी तो पत्नी के होते हुए भी दूसरा विवाह कर सकता है लेकिन महिला पति के मरने के बाद विवाह करना तो दूर जीवन भी खुशी से नहीं जी सकती। फिल्म एक ऐसी महिला की है जो एक अच्छे परिवार में सुखी जीवन जी रही…

रुक्मणी रावल

जन्म : जोधपुर
पहली राजस्थानी फिल्म : पराई बेटी
अब तक : 3 राजस्थानी फिल्मों में अभिनय किया। इन फिल्मों में इनके द्वारा निभाए गए चरित्र काफी पसंद किए गए। एक टेली फिल्म में भी अभिनय किया। 
विशेष : आकाशवाणी पर प्रसारित होने वाले युववाणी कार्यक्रम में कई प्रस्तुतियां दीं।
इन दिनों : जोधपुर में चिकित्सा सेवा में व्यस्त।

लालजी व्यास बनाएंगे भौजाई रो हेत

जयपुर. निर्देशक लालजी व्यास सामाजिक फिल्म भोजाई रो हेत बनाएंगे। इसका  काम वे बाईसा राणा राज के प्रदर्शन के बाद शुरू करेंगे।
व्यास के अनुसार उनकी यह फिल्म एक ऐसी महिला की कहानी है जो अपने ससुराल वालों के प्रति अपना पूरा फर्ज निभाती है। उसका पति शहर में आने के बाद अपने परिवार को बिल्कुल भुला देता है, लेकिन वह अपना फर्ज नहीं भूलती और अपने पति से नजर बचाकर उनका पूरा खयाल रखती है। ससुरालजनों के प्रति उसकी यह निष्ठा एक दिन पति को अपनी भूल का अहसास करा देती है। इस फिल्म के निर्माता भानुप्रताप राठी हैं।
कलाकारों का चयन शीघ्र : व्यास ने बताया कि फिल्म के लिए कलाकारों का चयन शीघ्र ही किया जाएगा। अभी वे अपनी फिल्म बाई सा राणा राज के प्रदर्शन की तैयारियों में लगे हुए हैं। इससे फ्री होते ही वे भोजाई रो हेत के लिए कास्टिंग करेंगे।

राकेश खत्री

जन्म :जोधपुर, राजस्थान
पहली राजस्थानी फिल्म : लाडलो
विशेष : पहली ही फिल्म वीनस जैसी बड़ी कंपनी के साथ। किशोर नमित कपूर एक्टिंग एकेडमी से अभिनय का प्रशिक्षण लिया। शामक डावर इंस्टीट्यूट ऑफ परफॉर्मिंग आटर््स से डांस सीखा। विभिन्न उत्पादों के विज्ञापनों में अभिनय।
इन दिनों : एमईटी कॉलेज बांद्रा से एमबीए की पढ़ाई।

राजस्थानी फिल्म एसोसिएशन का गठन

नीलू पहली अध्यक्ष निर्वाचित, 6 उपाध्यक्ष भी बनाए
मुंबई. राजस्थानी फिल्म उद्योग में जान फूंकने के उद्देश्य को लेकर हाल ही मुंबई में राजस्थानी फिल्म एसोसिएशन का गठन किया गया। इसकी पहली अध्यक्ष जानी-मानी अभिनेत्री नीलू सर्वसम्मति से निर्वाचित घोषित की गई। कार्यकारिणी में अभिनेता अरविंद कुमार को सचिव, लेखक-निर्देशक और अभिनेता शिरीष कुमार को प्रवक्ता व पारसमल चोरडिय़ा को कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके अलावा केसी मालू, संदीप वैष्णव, नंदकिशोर जालानी, आजाद खत्री, ओम त्रिपाठी, सन्नी अग्रवाल उपाध्यक्ष, सुभाष चपलोत संगठन मंत्री, पुष्कर साहू सह संगठन मंत्री, मनीष देव पालीवाल सह सचिव, क्षितिज कुमार सह प्रवक्ता, त्रिलोक सिरसलेवाला सह कोषाध्यक्ष बनाए गए हैं।
कार्यकारिणी सदस्य : तिलक राज, हितेश कुमार, एमएल सैन, प्रदीप मारू, अनिल कुलचैनिया, नरेंद्र कुमार, जस्मीन कुमार, सुनित कुमावत, डीएम धनरिया, महफूज अली कोहरी, सन्नी मंडावरा और कर्मवीर चौधरी।
सलाहाकर समिति : सुधाकर शर्मा, सूरज दाधीच, रमेश तिवारी, विजया राजस्थानी, राजेश रूपावत, लियाकत अजमेरी, सतीष देहरा, अली गनी, देवी दत्त, बंटी ठाकुर, डिंपल वर्मा,…

साधना रावल

जन्म : जोधपुर
पहली राजस्थानी फिल्म : मां थारी आळ्यूं घणी आवे
अब तक : 3 राजस्थानी फिल्मों में अभिनय किया। इन फिल्मों में इनके क्षरा निभाए गए हास्य चरित्र काफी पसंद किए गए। एक टेली फिल्म में भी अभिनय किया। 
विशेष : हास्य अभिनेत्री के रूप में पहचान बनाई।
इन दिनों : जोधपुर में चिकित्सा सेवा में व्यस्त।

बाई सुगना चाली सासरे के गाने रिकॉर्ड

जयपुर. राजस्थानी भाषा में बनने वाली फिल्म बाई सुगना चाली सासरे के गाने हाल ही में मुंबई के एक स्टूडियो में रिकॉर्ड किए गए।
फिल्म के निर्देशक संदीप वैष्णव ने बताया कि फिल्म के लिए लोकेशन का चयन कर लिया गया है। इसके अलावा कास्टिंग भी पूरी हो चुकी है। गानों की रिकॉर्डिंग कर ली गई है। अब तो जैसे ही गर्मी में नरमी आएगी शूटिंग शुरू कर दी जाएगी। इस फिल्म में राजस्थान के लगभग सभी बड़े मंदिरों को भी दिखाया जाएगा। इस फिल्म में राहुल वैष्ण, हेमाली, श्रेयशपाल, दिनेश कौशिक, अशोक बांठिया मुख्य भूमिकाओं में है।

अगले माह रिलीज होगी बाईसा राणा राज

जयपुर. सब कुछ योजनानुसार हुआ तो निर्देशक लालजी व्यास की फिल्म बाईसा राणा राज जुलाई में सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।
निर्देशक लालजी व्यास ने बताया कि यह एक धार्मिक फिल्म है जो लोक देवी बाईसा राणा राज पर आधारित है। बाईसा का मंदिर नागौर जिले में डेगाना क्षेत्र के हरनावा गांव में स्थित है। फिल्म में निशांत पंड्या, प्रगति, हरीश दर्जी, नीता, कृपा, कंचन रावल, साधना रावल, जगदीश व्यास, नीलेश वैष्णव, हनुमान सैन, मंगलसिंह, और रमेश तिवारी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म की कहानी और निर्देशन लालजी व्यास का है। स्क्रीन प्ले  शिरीष व्यास ने लिखा है। फिल्म के निर्माता पल्लवी पुरोहित, परेश्वर वैष्णव हैं तथा सह निर्माता गणेश राम प्रजापत और राजेंद्र चौधरी हैं।

खुशबू सिंह

उभरते सितारे

जन्म : जयपुर, राजस्थान
अब तक : एक राजस्थानी धारावाहिक में अभिनय। कई राजस्थानी गानों एवं भजनों के एलबमों में काम किया। देशभर में कई जगह स्टेज पर डांस की प्रस्तुति।
विशेष : पारंपरिक नृत्य एवं मॉडर्न डांस में पारंगत।
इन दिनों : जयपुर में पढ़ाई में व्यस्त। साथ ही अभिनय से भी जुड़ाव।

छात्र राजनीति पर फिल्म बनाएंगे आनंद खटाना

एक नामी प्रोडक्शन हाउस से नौकरी छोड़कर आए हैं निर्देशक, फिल्म का नाम है रणभूमि, बदला जा सकता है टाइटल शिवराज गूजर
अच्छी खासी नौकरी चल रही थी मजे से। एक दिन अचानक मन ने कहा-कुछ अलग करते हैं। खुद का। बस फिर क्या था इस्तीफा दिया और आ गया गांव। दिमाग में कई दिनों से एक स्क्रिप्ट चल रही थी, उसी पर काम शुरू कर दिया। अब फिल्म के लिए स्क्रिप्ट भी तैयार है और मैं भी। जल्द ही फिल्म फ्लोर पर होगी। यह कहना है बालाजी टेली फिल्म्स की नौकरी छोड़कर फिल्म बनाने उतरे आनंद खटाना का। वे जयपुर में अपनी फिल्म रणभूमि के लिए लोकेशन हंट करने आए थे। इस दौरान राजस्थानी सिनेमा डॉट टीके से उन्होंने अपनी फिल्म से जुड़ी बहुत सी बातें शेयर कीं।
आपकी फिल्म का सब्जेक्ट क्या है?
मेरी फिल्म छात्र राजनीति पर बेस्ड है। हालांकि सभी यही कहते हैं, लेकिन फिर भी मेरी फिल्म हटकर होगी। मेरा प्रस्तुतिकरण बिल्कुल अलग होगा। कॉलेज में राजनीति करने वाले छात्र जब देश की राजनीति में उतरते हैं यह उनके जीवन को किस प्रकार प्रभावित करती है और कैसे वे इसमें रहते हुए अपने लोगों के लिए कुछ कर गुजरते हैं, यही मेरी कहानी है।
आपने फिल्म का विषय छात…

युधिष्ठर सिंह भाटी

जन्म : बीकानेर, राजस्थान
पहली राजस्थानी फिल्म : लाड़की
अब तक : 6 राजस्थानी फिल्मों में अभिनय किया। पहली फिल्म हीरो के रूप में की। बाद वाली फिल्मों में खलनायक बनकर आए। करीब बारह धारावाहिकों में विभिन्न भूमिकाएं कीं। साथ ही हिंदी फिल्मों में भी सक्रिय।
विशेष : पहली ही फिल्म लाड़की में जानी-मानी अभिनेत्री नीलू के साथ नायक की भूमिका। नायक से एक दम खलनायक के रूप में अवतरित हुए और ऐसी भूमिकाओं में भी जान डाल दी।
इन दिनों : विदाई फिल्म पूरी कर चुके हैं। इसके अलावा राजू बन गयो एमएलए की भूमिका के लिए तैयारी में व्यस्त।
आने वाली फिल्म : चार दीवाने और एक दीवानी भी (हिंदी)

उपासना सिंह

 जन्म : होशियारपुर, पंजाब
पहली राजस्थानी फिल्म : बाई चाली सासरिये
अब तक :6 राजस्थानी फिल्मों में नायिका के रूप में अभिनय किया। पहली ही राजस्थानी फिल्म बड़ी व्यावसायिक हिट रही। हिंदी फिल्मों में हास्य भूमिकाओं में विशेष छाप छोड़ी। इसके अलावा करीब 38 भोजपुरी फिल्मों में काम किया। साथ ही गुजराती फिल्मों में भी सक्रिय।
विशेष : 7 साल की उम्र से जलंधर दूरदर्शन में बाल कलाकर के रूप में अभिनय की शुरुआत। दूरदर्शन नेशनल पर भी कई धारावाहिकों में विभिन्न चरित्र निभाए। लेडी इंस्पेक्ट में निभाया गया कैरेक्टर काफी चर्चा में रहा।
इन दिनों : दूरदर्शन पर धारावाहिक आशिक बीवी का व स्टार प्लस पर राजा की आएगी बारात की शूटिंग में व्यस्त।
आने वाली फिल्म : हू इज देअर (हिंदी)

कंचन रावल

 जन्म : जोधपुर
पहली राजस्थानी फिल्म : मां-बाप ने भूल ज्यो मती
अब तक : 9 राजस्थानी फिल्मों में अभिनय किया। इस दौरान विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं में अपनी छाप छोड़ी। चार टेली फिल्मों में भी अभिनय किया। 
विशेष : थियेटर पर 1989 से सक्रिय। करीब 20 नाटकों में विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं का निर्वाह। थियेटर व सिनेमा में लगातार सक्रिय। दूरदर्शन व आकाशवाणी के कार्यक्रमों में भी भागीदारी।
इन दिनों : आने वाले प्रोजेक्ट्स में व्यस्त।

धन्ना भगत पर फिल्म बनाएंगे निर्देशक सन्नी अग्रवाल

श्री जीण-श्याम प्रोडक्शन के बैनर तले बनने वाली इस फिल्म के प्रोडयूसर हैं रजनीकांत वोरा, जून के अंतिम सप्ताह में शुरू होगी शूटिंग जयपुर. राजस्थान के जनमानस में बसे धन्ना भगत के जीवन पर राजस्थानी फिल्मों के जान-माने निर्देशक सन्नी अग्रवाल भगत धन्ना जाट के नाम से फिल्म बना रहे हैं।
फिल्म के निर्देशक सन्नी अग्रवाल ने बताया कि यह फिल्म श्री जीण-श्याम प्रोडक्शन के बैनर तले बनाई जा रही है। इसके प्रोड्यूसर रजनीकांत वोरा हैं। पटकथा सूरज दाधीच ने लिखी है और संगीत निर्देशन सतीश देहरा का है।
गाने रिकॉर्ड :फिल्म में छह गाने हैं, जिनकी रिकॉर्डिंग पिछले दिनों संगीतकार सतीश देहरा के निर्देशन में मुंबई के स्टार रिकॉर्डिंग स्टूडियो में की गई। सतीश देहरा, पामेला जैन, रेखा राव और ओमप्रकाश मिश्रा ने गानों को स्वर दिए हैं।
कलाकारों का चयन जारी : फिल्म में धन्ना जाट की भूमिका निर्देशक सन्नी अग्रवाल खुद निभाएंगे। बाकी कलाकारों का चयन किया जा रहा है। शूटिंग जून के अंतिम सप्ताह में शुरू करने का विचार है।

आच्छी फिल्म हर दौर मैं चाली छे

नीलू-अरविंद अर जगदीश व्यास स्यूं हुई मन की बात, जाणकार के अठे सगाई समारोह में आया छा तीनूं, राजस्थानी कलाकारां की खबर छापणे पर भास्कर ने दियो घणूं-घणूं धन्यवाद आपणां सनीमां को दौर फेरूं आवे लो। जोरदार तरीका स्यूं आवे लो। आच्छी फिल्म हर दौर मैं चाली छे अर हर दौर मैं चाले ली। यो केणूं छो राजस्थानी फिल्मां की जाणी-पिछाणी हीरोइन नीलू को। बींद अरविंद के साथ एक सगाई समारोह में शामिल होबा के तांई आया छा जैपुर। ईं समारोह मैं ही आया छा दूसरी रिलीज राजस्थानी फिल्म स्यूं लेर आज तक फिल्मां में सक्रिय कलाकार जगदीश व्यास। होटल क्लार्क आमेर में बातचीत के दौरान यांकी शिकायत छी की आपणां प्रदेश का अखबार ही याने कवरेज कोने देवे, जबकि हिंदी भाषी धारावाहिकां का छोटा स्यूं छोटा कलाकार की भी बड़ी-बड़ी खबरां छापे छे। यां का मन मैं बैठ्योड़ी या धारणा राजस्थान को प्रसिद्ध समाचार पत्र दैनिक भास्कर तोड़ी। भास्कर न केवल यांको इंटरव्यू छाप्यो बल्कि सिटी भास्कर का उण पेज पर यांने जगह दी जठे अब तक केवल बॉलीवुड या हॉलीवुड का कलाकारां ने ही जगां मिलबो करे छी। जयपुर स्यूं रवाना होती बखत तीनां का चेहरा पर इं बात की खुशी …

शिरीष कुमार

जन्म : साकर में।
पहली राजस्थानी फिल्म : सुपातर बीनणी।
अब तक : 16 राजस्थानी फिल्मों में अभिनय। पांच में नायक के रूप में तथा 11 में केंद्रीय भूमिका निभाई।
विशेष : तैंतीस वर्षों से थिएटर व सिनेमा में सक्रिय। कई नाटकों का लेखन व निर्देशन। रामू चनणा, ओजी रे दीवाना, पराई बेटी और बीरो भात भरण ने आयो जैसी कई हिट राजस्थानी फिल्मों का लेखन। साथ ही कई फिल्मों में इनके लिखे गीत खासे लोकप्रिय रहे।
सम्मान व पुरस्कार
1. अंतरराष्ट्रीय राजस्थानी सम्मेलन(2000) में फिल्म व नाट्य क्षेत्र में योगदान के लिए विशेष सम्मान।
2. गणगौर उत्सव (2006) पर राजस्थानी जन जागरण प्रवासी संघ मुंबई एवं दोपहर सामना द्वारा विषेष सम्मान।
3. पिंकसिटी प्रेस क्लब में 25 फरवरी 2007 में आयोजित राजस्थानी फिल्म अवार्ड समारोह में बेस्ट एक्टर अवार्ड।
4. राजस्थान दिवस पर मुंबई में आयोजित राजस्थानी फिल्म फेयर अवार्ड में घूमर कला अकादमी की ओर से लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड।
इन दिनों : बहू म्हारी लाखां री, भाई-बंदी, बिदाई, त्रिपुर सुंदरी सहित  अन्य आने वाली फिल्मों में अभिनय व लेखन में व्यस्त

मुकेश चंद्र शर्मा

 जन्म : राजस्थान की राजधानी जयपुर में।
पहली राजस्थानी फिल्म : म्हारो बीरो है घनश्याम।
अब तक :5 राजस्थानी फिल्मों में चरित्र भूमिकाएं कीं। इसके अलावा कई वीडियो फिल्मों में अभिनय।
विशेष : थिएटर पर सक्रिय। दूरदर्शन सहित अन्य चैनलों पर प्रसारित धारावाहिकों के साथ ही हिंदी फिल्मों में भी विभिन्न रोल किए।
इन दिनों :राजा मोरध्वज सहित दो फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त।

हम ही नहीं देखेंगे तो कौन देखेगा हमारा सिनेमा

राजस्थानी भाषा की सौवीं फिल्म होने का गौरव प्राप्त करने वाली फिल्म ओढ़ ली चुनरिया के नायक इमरान खान कोहरी बॉम्बे से बीकानेर जाते समय कुछ देर के लिए जयपुर रुके। इस दौरान हमने उनसे राजस्थानी सिनेमा की स्थिति पर चर्चा करने के साथ उनके कैरिअर के बारे में भी बात की।  शिवराज गूजर दूसरे राज्यों की तुलना में आप राजस्थानी सिनेमा को कहां पाते हैं।
अन्य राज्यों से राजस्थानी सिनेमा की तुलना करना ही बेमानी है क्योंकि वहां सिनेमा को सरकार का पूरा सपोर्ट मिलता है। सब्सिडी के साथ ही अन्य कई सहयोग सरकार की ओर से निर्माता को मिलते हैं। हमारे यहां तो सब्सिडी और अन्य सहायताएं तो दूर की बात है टैक्स फ्री करवाने में निर्माता-निर्देशकों की चप्पलें घिस जाती हैं।
यानी सरकार सहयोग करे तो राजस्थानी सिनेमा में जान फूंकी जा सकती है?
बिल्कुल, लेकिन इसके साथ ही हमारे लोगों को भी राजस्थानी फिल्मों के प्रति नजरिया बदलना पड़ेगा। जैसे ही कोई हिंदी या इंग्लिस डब फिल्म रिलीज होती है लोग देखने को टूट कर पड़ते हैं, लेकिन राजस्थानी फिल्म के प्रति ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिलता। अपनी भाषा के सिनेमा के प्रति यह उदासीनता भी राज…

आशासिंह भाटी

जन्म : आसाम, गुवाहाटी
पहली राजस्थानी फिल्म : मां राजस्थान री
अब तक : सात राजस्थानी फिल्मों में अभिनय। करीब  200 वीडियो फिल्में और एलबमों में काम किया। करीब 8 विज्ञापन फिल्में की।
विशेष : थियेटर पर 1997 से सक्रिय। करीब 20 नाटकों में विभिन्न प्रकार की भमिकाओं का निर्वाह। इसके अलावा नुक्कड़ नाटकों में लगातार सक्रिय।
इन दिनों : दो राजस्थानी फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त। एक टेली फिल्म बलजी-भुरजी में भी कर रही हैं अभिनय।

मनीष कल्ला

 जन्म : जोधपुर में।
पहली राजस्थानी फिल्म : बाई रा भाग।
अब तक : चार राजस्थानी फिल्मों में अभिनय किया। एक रिलीज हो चुकी है, तीन आने वाले दिनों में रिलीज होंगी।
विशेष : 1983 से थियेटर से जुड़ाव। इस दौरान कई नाटकों में अभिनय। कई राजस्थानी वीडीयो एलबमों में भी काम किया।
इन दिनों : अपनी आने वाली फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त।

...नहीं तो हम बताया करेंगे-बेटा कभी राजस्थानी फिल्में भी बना करती थीं

हाल ही रिलीज हुई राजस्थानी फिल्म 'सुपात्तर बेटी' में मुख्य खलनायक की भूमिका निभाई है राज जांगिड़ ने। भीलवाड़ा जिले के गुलाबपुरा कस्बे के एक साधारण परिवार में जन्मा राज दूसरी कक्षा तक पढ़ा हुआ है। आज उसके अभिनय की चमक में पढ़ाई में रही यह कमजोरी बहुत पीछे छूट गई है। हमसे बातचीत में उन्होंने अपने जीवन के हर पहलू पर चर्चा की। आपके हिसाब से राजस्थानी फिल्मों के पिछडऩे का क्या कारण है?
राजस्थानी फिल्मों के पिछडऩे का सबसे बडा कारण राज्य सरकार की बेरुखी है। पर्याप्त सुविधाएं एवं लोकेशन उपलब्ध नहीं होने के साथ ही सिनेमा हॉल नहीं मिलना भी बड़े कारण हैं, जिनकी वजह से राजस्थानी फिल्म जगत की कमर टूट रही है। दूसरे राज्यों की बात करें तो वहां की सरकारें फिल्मकारों को सब्सिडी देने के साथ ही अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी पूरा सहयोग करती है। यही कारण है कि वहां का सिनेमा प्रगति कर रहा है। यदि समय रहते राज्य सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो राजस्थानी फिल्में इतिहास की बात बन जाएंगी और हम अपने बच्चों को बताया करेंगे, 'बेटा हमारे जमाने में राजस्थानी फिल्में बना करती थीं।'
ज्यादातर …

इमरान खान

जन्म : बीकानेर में।
पहली राजस्थानी फिल्म : ओढ़ ली चुनरिया।
अब तक : एक राजस्थानी फिल्म में नायक। दो  निर्माणाधीन हैं, जिनमें भी नायक की ही भूमिका में।  बॉलीवुड में भी एंट्री। घाव व कजरी फिल्में नजदीकी दिनों में ही होंगी रिलीज।
विशेष : हिंदी फिल्मों में सक्रिय लेकिन राजस्थानी सिनेमा से विशेष प्यार। पहली ही फिल्म को राजस्थानी भाषा में रिलीज होने वाली सौवीं फिल्म का गौरव।
इन दिनों : दो राजस्थानी व एक हिंदी फिल्म में अभिनय ।

क्या ये फिल्में सिनेमा हॉलों में लगती है?

यह हकीकत हमें स्वीकारनी पड़ेगी, कि शहरी लोगों को हमारी फिल्मों की खबर ही नहीं है शिवराज गूजर
मेरे एक अभिनेता मित्र और मैं कैंटीन में बैठे बात कर रहे थे। इसी दौरान हमारी एक साथी पत्रकार वहां आईं तो मैनें उन्हें उनसे परिचय कराने के लिए बुला लिया। जब मैंने उन्हें बताया कि ये राजस्थानी फिल्मों के हीरो हैं। उनकी फिल्म की एक सीडी भी उन्हें दिखाई। सीडी देखने के बाद उन्होंने सवाल किया-क्या ये फिल्में सिनेमा हॉल में लगती हैं? मैंने तो कभी इनके पोस्टर बाजार में लगे नहीं देखे।
उनके इस सवाल ने हमें बगलें झांकने पर मजबूर कर दिया। उनका यह सवाल बेमानी नहीं था। यह हकीकत हमें स्वीकारनी पड़ेगी, कि शहरी लोगों को हमारी फिल्मों की खबर ही नहीं है। कारण भी साफ है-हम प्रचार में तो पीछे हैं ही, राजस्थानी फिल्में मल्टीप्लेक्स में भी नहीं लगती। सिंगल स्क्रीन में लगती भी हैं तो वो भी ऐसे सिनेमा हॉल्स में जिनमें जयपुर के लोग जाना ही पसंद नहीं करते। ऐसे में फिल्म दो-तीन दिन से ज्यादा कैसे चल सकती है।
सोच बदलनी पड़ेगी 
जयपुर में राजस्थानी फिल्म कोई देखने ही नहीं आता, हमें इस सोच को बदलना पड़ेगा। फिल्म बनाते समय हमे…

'सुपात्तर बेटी' देखने उमड़ी महिलाएं

भीलवाड़ा के महाराणा टाकीज में हुई रिलीज, पहला शो ही हाउसफुल
भीलवाड़ा. निधि मूवीज की फिल्म सुपात्तर बेटी शुक्रवार को महाराणा टाकीज में रिलीज की गई। फिल्म को देखने महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। आलम यह था कि एक्स्ट्रा सीटें लगाने के बाद भी कई महिलाओं को खड़े-खड़े फिल्म देखनी पड़ी। लोगों का कहना था कि  बरसों बाद भीलवाड़ा में राजस्थानी फिल्म के लिए किसी टॉकीज में इतनी अधिक भीड़ देखने को मिली।
इससे पहले फिल्म के पहले शो में आयोजित रिलीज समारोह में महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक जाकिरा बेग ने कहा कि राजस्थानी फिल्म सुपात्तर बेटी देश की ज्वलंत समस्या दहेज के खिलाफ महिलाओं में जागरूकता लाएगी। ऐसी  संदेशप्रद फिल्मों से ही समाज का विकास संभव है। महिला अरबन को-ऑपरेटिव बैंक अध्यक्ष कीर्ति बोरदिया एवं समाजसेवी मंजू पोखरना ने भी फिल्म की प्रशंशा की। निर्माता राजू जांगिड़ ने अतिथियों का गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया। इस मौके पर रंगकर्मी कुलदीप टांक, असलम छीपा, पूर्व पार्षद योगेंद्रसिंह, शिवकंवर यदुवंशी सहित अन्य फिल्म प्रेमी और महिलाएं मौजूद थीं।  फिल्म के मुख्य कलाकार राज खन्ना, सुप्रेरणा सिंह, दि…

शशि शर्मा

जन्म : राजस्थान की राजधानी जयपुर।
पहली राजस्थानी फिल्म : चांदा थारे चांदणें।
अब तक : 5 राजस्थानी फिल्मों में नायिका के रूप में अभिनय। राजस्थानी फिल्मों से शुरुआत कर बॉलीवुड में सशक्त मुकाम बनाने वाली अभिनेत्री। बॉलीवुड के प्रसिद्ध निर्देशकों के साथ करीब 33 हिंदी फिल्मों में विभिन्न किरदार निभाए। विभिन्न चैनल्स के 64 चर्चित धारावाहिकों में अभिनय।  पैराशूट ऑयल समेत पांच विज्ञापन फिल्में भी कीं।
विशेष : राजस्थानी सिनेमा से विशेष प्यार। मन में एक कसक है कि मेरे प्रदेश का सिनेमा अन्य प्रदेशें की अपेक्ष पिछड़ गया है। इसके विकास के लिए बहुत कुछ करने की मंशा। फिल्मसिटी के लिए कुछ करने को मिले तो सहर्ष तैयार।
सम्मान-पुरस्कार : अजनबी, श्री कृष्णा और औरत धारावाहिक के लिए बेस्ट एक्ट्रेस व बेस्ट स्पोर्टिंग एक्ट्रेस अवार्ड।
इन दिनों : हिंदी फिल्म चुटकी बजा के कर रही हैं। इसके अलावा कई धारावाहिकों में अभिनय ।

सपना भी सच हुआ और सफलता भी मिली

माया नगरी में बिना किसी गॉडफादर के मुकाम बनाया जयपुर की शशि शर्मा ने
संतोष निर्मल

मुंबई माया नगरी है। यहां रोज सैकड़ों लोग फिल्मी दुनियां में छा जाने का सपना आंखों में लिए उतरते हैं, लेकिन इनमें से बिरले ही होते हैं, जिनका भाग्य साथ देता है। ऐसे ही बिरले लोगों में एक हैं जयपुर की शशि शर्मा हैं। कहते हैं कि फिल्मी दुनियां में बिना गॉडफादर के सफल होना टेढ़ी खीर है, शशि इस मिथक को तोडऩे वाले उन चंद कलाकारों में से हैं जिन्होंने अपने दम पर खुद के लिए जगह बनाई। उन्होंने प्रतिष्ठित बैनरों के साथ कई सुपरहिट फिल्मों में काम ही नहीं किया बल्कि अपने अभिनय से लोगों का ध्यान भी खींचा।
इस तरह हुई शुरुआत
शशि ने थियेटर के जरिए फिल्मों में एंट्री पाई। उनकी पहली फिल्म राजस्थानी थी। नाम था, चांदा थारे चांदणे। इसमें वे नायिका थीं और नायक थे भैरोंसिंह गुर्जर। इस फिल्म के मिलने की अपनी एक कहानी है। निर्देशक मोहन कविया उन दिनों अपनी फिल्म चांदा थारै चांदणा के लिए नायिका की तलाश में थे। एक शाम शशि का नाटक देखा तो बस तय कर लिया कि उनकी फिल्म की नायिका शशि ही होंगी। सन् 1987 में यह फिल्म प्रदर्शित हुई और अच्छी…

मैंने हमेशा नये कलाकारों को तरजीह दी

अपनी नई फिल्म 'बाई सुगना चाली सासरे' के लिए लोकेशन देखने जयपुर आए निर्माता-निर्देशक संदीप वैष्णव से बातचीत
शिवराज गूजर
जयपुर. मैने हमेशा नये कलाकारों को तरजीह दी है। यहां तक कि कई फिल्मों में तो मैनें ठेठ ग्रामीणों से भी अभिनय करवाया है। फिल्म तैयार होने के बाद मैने पाया कि उनके अभिनय में ज्यादा वास्तविकता थी। यह कहना है राजस्थानी फिल्मों के जाने-माने निर्माता निर्देशक संदीप वैष्णव का। वे इन दिनों अपनी नई फिल्म 'बाई सुगना चाली सासरे' की शूटिंग के लिए लोकशन देखने राजस्थान के दौरे पर हैं। पाली व बीकानेर होते हुए वे गुरुवार को जयपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपनी आने वाली फिल्म के बारे में बताया। पाली, बीकानेर व जोधपुर सहित राजस्थान के लगभग सभी बड़े कस्बों में इसकी शूटिंग की जाएगी। इसके साथ ही मेरी कोशिश रहेगी कि मैं फिल्म में वहां के स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दूं।
महिला प्रधान विषय से विशेष लगाव
मुझे नारी प्रधान विषय ज्यादा लुभाते हैं। मेरी पहली राजस्थानी फिल्म थारी-म्हारी भी नारी प्रधान फिल्म थी। इसके अलावा-मां थारी ओळ्यूं घणी आवे, घर मैं राज लुगायां क…

खबरों में रहोगे तो लोग जानेंगे

सिनेमा शो-बिज है, इसमें चर्चाओं में बने रहना जरूरी है, इस दुनिया का हिस्सा होते हुए भी हम पता नहीं क्यों अब तक यह नहीं समझ पाए शिवराज गूजर
बॉलीवुड-हॉलीवुड, टॉलीवुड और यहां तक कि भोजपुरी फिल्मों के स्टार टीवी और अखबारों के अलावा विभिन्न पत्रिकाओं में रोज दिखाई देते हैं। राजस्थानी फिल्मों के कलाकारों की स्थिति इसके उलट है। वे बिल्कुल भी दिखाई नहीं देते। पिछले दिनों राजस्थानी फिल्मां रो उच्छब आयोजन समिति की ओर से आयोजित गोष्ठी में यह बात उभरकर आई कि राजस्थानी सिनेमा के कलाकारों को मीडिया जगह नहीं देता। यहां तक कि राजस्थान के मीडिया में भी बाहर के कलाकार ही नुमाया होते हैं।
बात सही है, लेकिन इसके लिए मीडिया के साथ ही खुद कलाकार व राजस्थानी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग भी पूरी तरह से जिम्मेदार है। न तो फिल्म का मुहुर्त होता है उसका किसी को पता होता है और ना ही इस बात का कि कहां शूटिंग चल रही है। जब तक इस तरह की खबरें मीडिया में नहीं जाएंगी लोगों को कैसे पता चलेगा कि कोई राजस्थानी फिल्म भी बन रही है। मीडिया ही एक ऐसा माध्यम है जो आपको और आपके उत्पाद को लोगों तक पहुंचाता और उनमें उसके प्रति …

हम आपके साथ हैं : राजीव अरोड़ा

 राजस्थानी फिल्मों पर गोष्ठी (दूसरी कड़ी): सेंसर बोर्ड के सदस्य राजीव अरोड़ा ने  इस बात से सहमति जताई कि सरकार को राजस्थानी फिल्मकारों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए जयपुर. केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड के सदस्य राजीव अरोड़ा ने राजस्थानी फिल्मां रो उच्छब आयोजन समिति की ओर से होटल लक्ष्मी विलास में आयोजित "पहचान क्यों नहीं बना पा रही हैं राजस्थानी फिल्में" विषयक गोष्ठी में कहा कि वे पूरी तरह से राजस्थानी फिल्मकारों के साथ हैं। वे उनकी समस्याओं को सरकार के सामने भी उठाएंगे। उन्होंने भी इस बात से सहमति जताई कि सरकार को राजस्थानी फिल्मकारों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। कम से कम शूटिंग के लिए लोकेशन तो निशुल्क ही देनी चाहिए।
एक कमेटी गठित हो
राजीव अरोड़ा ने कहा कि निशुल्क लोकेशंस उपलबध कराने में मुश्किल यह आती है कि यह पता नहीं चल पाता कि वह व्यक्ति वास्तव में राजस्थानी फिल्म बना रहा है या उसका दुरुपयोग तो नहीं कर रहा है। इसके लिए एक ऐसी कमेटी गठित की जानी चाहिए, जो राजस्थानी फिल्म निर्माताओं के लिए संस्तुति कर सके कि उन्हें लोकेशंस निशुल्क दी जाए। शूटिंग संबंधी नियमों का निर्धारण …

महंगी लोकेशन पर कैसे शूट हों राजस्थानी फिल्में : मोहन कटारिया

राजस्थानी फिल्मों पर गोष्ठी (पहली कड़ी) : मोहन कटारिया ने बताई निर्माता निर्देशकों के समक्ष आने वाली परेशानियां जयपुर. राजस्थानी फिल्मों के पिछडऩे का एक कारण यह भी है कि वह आज भी खेत- खलिहानों में ही शूट हो रही हैं। राजस्थानी फिल्मों के निर्माता की यही कोशिश रहती है कि कोई हवेली या कोठी उसे बिना पैसे दिए  शूटिंग के लिए मिल जाए तो काम चल जाए। पूरी ल्मि के निर्माण के दौरान इस काम चलाऊ आदत के कारण उसे कई समझौते भी करने पड़ते हैं। कभी-कभी स्थान के मालिक या उसके परिजनों- मित्रों को न चाहते हुए भी फिल्म में काम देना पड़ता है। इससे फिल्म की गुणवत्ता पर फर्क पड़ता है। यह कहना था निर्माता-निर्देशक- अभिनेता मोहन कटारिया का। वे राजस्थानी फिल्मां रो उच्छब आयोजन समिति की ओर से होटल लक्ष्मी विलास में आयोजित पहचान क्यों नहीं बना पा रही हैं राजस्थानी फिल्में विषयक गोष्ठी में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने राजस्थानी फिल्मों से जुड़ी अनेक समस्याओं को उजागर किया।
सरकार का उपेक्षापूर्ण रवैया
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राजस्थानी फिल्मों के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार करती है। यहां की लोकेशन के रेट इतने अधिक ह…

विधवाओं के प्रति सोच बदलेगी "दूसरी विदाई"

आने वाली राजस्थानी फिल्म
फिल्म का नाम : दूसरी बिदाई
बैनर : राघव पिक्चर्स एण्ड ईन्टरटेनमेन्ट
कहानी : लोकेश मेनारिया
निर्देशक : लोकेश मेनारिया
कलाकार : मनीष कल्ला, अजयकरण, जाह्नवी, रमेश बोहरा, रेखा बालड़, गजेन्द्र शर्मा, अन्जना पालीवाल, दीपक दीक्षित, नीतु कच्छारा, आशु , नरेन्द्र आशियां एवं अन्य।
डाइरेक्टर की नजर में फिल्म
दूसरी बिदाई विधवा विवाह पर आधारित एक पारिवारिक फिल्म है। हिन्दी में तो विधवा विवाह पर कई फिल्में बनी हैं, जिनमें पुरानी में प्रेम रोग और नई में बाबुल प्रमुख है, पर राजस्थान में ऐसे प्रयास बहुत कम हुए हैं।
दूसरी विदाई इनसे थोड़ी हटकर है। इसमें विधवाओं की स्थिति दर्शाने के साथ ही कैसे उनका जीवनस्तर सुधारा जा सकता इस पर तो फोकस किया ही गया है, साथ ही इस बात को भी प्रमुखता से उभारा गया है कि हमें इस मर्दाना सोच को बदलना पड़ेगा कि आदमी तो पत्नी के होते हुए भी दूसरा विवाह कर सकता है लेकिन महिला पति के मरने के बाद विवाह करना तो दूर जीवन भी खुशी से नहीं जी सकती।
फिल्म एक ऐसी महिला की है जो एक अच्छे परिवार में सुखी जीवन जी रही है। अचानक विपदा उस पर टूटती है और उसके पति की मौत हो जाती…

सरकार गंभीरता से ले राजस्थानी सिनेमा को

सरकारी उपेक्षा का ही परिणाम है कि सात दशक में भी पहचान नहीं बना पाया राजस्थानी सिनेमा, संवारने की घोषणाएं तो कई हुईं, लेकिन अमल नहीं हुआ संतोष निर्मल
जयपुर. राजस्थानी फिल्में अपने सात दशक (६८ वर्ष) पूरे करने जा रही हैं। चिंता की बात यह है कि ये अभी भी अपनी पहचान को तरस रही हैं। राजस्थानी फिल्मों से जुड़े लोग अलग-अलग पड़े हुए हैं। कुछ हिम्मत करके अपने बल पर फिल्में बना भी रहे हैं, पर न तो उन्हें सिनेमाघरों का समर्थन मिलता है न और ही सरकार का। उनकी फिल्में छोटे शहरों व कस्बों तक ही सीमित होकर रह जाती हैं। न तो राजस्थानी फिल्मों को मनोरंजन कर से मुक्त किया जाता है, न उसकी शूटिंग के लिए लोकेशन के शुल्क में छूट दी जाती है। उनसे वही शुल्क वसूला जाता है, जो करोड़ों के बजट वाली हिंदी फिल्मों के निर्माता से लिया जाता है। ऐसे में राजस्थानी फिल्मों के निर्माता-निर्देशक अपनी फिल्मों की शूटिंग गांवों व इसी तरह की अन्य जगह पर करने को मजबूर होते हैं। यही कारण है कि सांस्कृतिक रूप से धनी राजस्थान की फिल्मों में ही राजस्थान बहुत कम नजर आता है।
समय-समय पर सरकार राजस्थानी फिल्मों की सहायता की घोषणा अवश्य …

पहचान क्यों नहीं बना पा रही हैं राजस्थानी फिल्में विषय पर गोष्ठी 29 को

विशिष्ट वक्ता फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर श्याम सुंदर झालानी, निर्माता-निर्देशक मोहन कटारिया तथा अरुण मुदगल होंगे
जयपुर. राजस्थानी फिल्मां रो उच्छब आयोजन समिति की ओर से 29 मार्च को दोपहर 3 बजे होटल लक्ष्मी विलास में "पहचान क्यों नहीं बना पा रही हैं राजस्थानी फिल्में" विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।
आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेंद्र बोड़ा ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता सूचना एवं जनसंपर्क राज्यमंत्री अशोक बैरवा करेंगे तथा विशिष्ट अतिथि सेंसर बोर्ड के पूर्व सदस्य राजीव अरोड़ा होंगे। विशिष्ट वक्ता फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर श्याम सुंदर झालानी, निर्माता-निर्देशक मोहन कटारिया तथा अरुण मुदगल होंगे।

लियाकत अजेमरी

जन्म : राजस्थान के सीकर कस्बे में।
संगीतकार के रूप में पहली राजस्थानी फिल्म : चूनड़ी।
अब तक : बाबा रामदेव, लक्ष्मी आई आंगणें, छम्मक छल्लो और हिवड़े स्यूं दूर मत जा जैसी कई फिल्मों में संगीत निर्देशन।
विशेष : संगीत में डिप्लोमा- इंस्ट्रूमेंट वायलिन और पियानो में विसारत। कई हिंदी फिल्मों व धारावाहिकों में संगीत निर्देशन। 
इन दिनों : आने वाली फिल्मों व धारावाहिकों में संगीत देने में व्यस्त।

मोहन कटारिया

जन्म : राजस्थान की राजधानी जयपुर के विसनावाला में।
पहली निर्देशित राजस्थानी फिल्म : धरती रो धणी।
अब तक : डिग्गीपुरी का राजा व धरती रोधण का निर्माण। लाखा, जय करणी माता, लाडोबाई एवं डिग्गीपुरी का राजा में चीफ असिस्टेंट के रूप में कार्य।
विशेष : राजस्थानी भाषा से विशेष लगाव। तीसमारखां सहित कई राजस्थानी भाषी धारावाहिकों का निर्माण-निर्देशन व अभिनय।
इन दिनों : अपने बैनर की नई फिल्म व धारावाहिक के निर्माण की तैयारियों में व्यस्त।

संदीप वैष्णव

 जन्म : पाली जिले की मारवाड़ जंक्शन के धनला गांव में।
पहली राजस्थानी फिल्म : थारी-म्हारी
अब तक : नौ राजस्थानी फिल्मों का निर्माण व निर्देशन।
विशेष : आंकड़ों के हिसाब से देखें तो अब तक सबसे ज्यादा राजस्थानी फिल्में बनाने वाले निर्माता निर्देशक हैं फ्लाइट इंजीनियर संदीप वैष्णव। बॉलीवुड के कई वरिष्ठ निर्देशकों के साथ काम किया। राजस्थानी भाषा व फिल्मों से विशेष लगाव।
आने वाली फिल्म : बाई सुगना चाली सासरे।
इन दिनों : बाई सुगना चाली सासरे के निर्माण में व्यस्त।

लोकेश मेनारिया

 जन्म : उदयपुर।
पहली राजस्थानी फिल्म : दूसरी विदाई ()।
अब तक : कई वृत्तचित्रों का लेखन व निर्देशन। राजस्थानी में निर्देशक के रूप में पहली फिल्म।
आने वाली फिल्म : दूसरी विदाई।
इन दिनों : अपनी फिल्म दूसरी विदाई के प्रमोशन व रिलीज के लिए वितरकों से संपर्क में व्यस्त।

क्यों नहीं बनी राजस्थानी फिल्मों की पहचान?

होटल लक्ष्मी विलास में गोष्ठी 29 को
जयपुर . राजस्थानी फिल्मां रो उच्छब आयोजन समिति की ओर से 'क्यों नहीं बनी राजस्थानी फिल्मों की पहचान' विषय पर होटल लक्ष्मी विलास में 29 मार्च को गोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसमें राजस्थानी सिनेमा से जुड़े निर्माता-निर्देशक, कलाकार व वितरक विचार व्यक्त करेंगे।

जस्मिन कुमार

जन्म : अजमेर जिलक के ब्यावर कस्बे में।
पहली राजस्थानी फिल्म : प्रीत ना जाने रीत।
अब तक : दो राजस्थानी फिल्मों में अभिनय।
इन दिनों : आने वाली फिल्म राजू बण गयो एमएलए की शूटिंग में व्यस्त।

हितेश कुमार

जन्म : अजमेर जिला के ब्यावर कस्बे में।
पहली राजस्थानी फिल्म : ओ जी रे दीवाना।
अक तक : तीन राजस्थानी फिल्मों में अभिनय। धारावाहिक वतन के रखवाले में भी भूमिका निभाई।
इन दिनों : आने वाली फिल्म में व्यस्त।

मास्टर कैजर

उम्र: 8 साल जन्म स्थान : मुंबई
पहली राजस्थानी फिल्म : हिवड़े स्यूं दूर मत जा
विशेष : जानी मानी अभिनत्री नीलू व अभिनेता अरविंद कुमार के पुत्र।
अब तक : कई एड फिल्म्स व वतन के रखवाले धारावाहिक में अभिनय।

मोहन कटारिया

जन्म : राजस्थान की राजधानी जयपुर के विसनावाला में।
पहली राजस्थानी फिल्म : बेटी राजस्थान री।
अब तक : 15 राजस्थानी फिल्मों में अभिनय किया। नायक सहित विभिन्न भूमिकाओं का सफलतापूर्वक निर्वाह। राजस्थानी में धरती रो धणी व डिग्गपुरी का राजा फिल्मों का निर्माण।
विशेष : राजस्थानी भाषा से विशेष लगाव। तीसमारखां सहित कई राजस्थानी भाषी धारावाहिकों का निर्माण-निर्देशन व अभिनय।
इन दिनों : अपने बैनर की नई फिल्म व धारावाहिक के निर्माण की तैयारियों में व्यस्त।

सन्नी अग्रवाल

जन्म : राजस्थान के सीकर कस्बे में।
पहली राजस्थानी फिल्म : बापू जी ने चाहे बीनणी।
अब तक : जय जीण माता और म्हारा श्याम धणी दातार सहित कई राजस्थानी फिल्मों में अभिनय। 
विशेष : ज्यादातर धार्मिक व सामाजिक फिल्मों में ही अभिनय। धार्मिक फिल्मों का निर्माण व निर्देशन भी।
सम्मान-पुरस्कार : राजस्थानी रत्न अवार्ड और मरुधरा गौरव अवार्ड, धर्म रत्न और कर्मवीर पुरस्कार सहित कई अन्य सम्मान।
इन दिनों : एक प्रसिद्ध भक्त के जीवन पर आधारित अपनी नई फिल्म की तैयारियों में व्यस्त।

रमेश गुणावता

जन्म : राजस्थान के दौसा जिले की लालसोट तहसील के गांव उदेपुरा।
पहली राजस्थानी फिल्म : कृपा करो सूंधा माता।
अब तक : राजस्थानी में दो फिल्में की हैं। दूसरी फिल्म है गुरु कृपा। इसके अलावा हिंदी धारावाहिकों में सक्रिय। 
सम्मान-पुरस्कार : कृपा करो सूंधा माता फिल्म
के लिए बेस्ट हास्य कलाकार का पुरस्कार।
इन दिनों : पपळाज माता पर बनाई जाने वाली नई फिल्म की तैयारियों में व्यस्त।

अरविंद कुमार

जन्म : राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित ब्यावर कस्बे में।
पहली राजस्थानी फिल्म : मां राजस्थानी
अब तक : सात राजस्थानी फिल्मों में अभिनय। इनमें से पांच में नायक की भूमिका निभाई।
विशेष : राजस्थानी सिनेमा की सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री नीलू से विवाह। मानव जागृति मिशन के ब्रांड एंबेसेडर। राजस्थानी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रांतों मे सांस्क्ृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति।
इन दिनों : पत्नी नीलू के साथ अपने बैनर की नई फिल्म की तैयारियों में व्यस्त।

नीलू

जन्म :राजस्थान के फतेहपुर शेखावाटी क्षेत्र में।
पहली राजस्थानी फिल्म :सुपातर बीनणी।
अब तक :17 फिल्मों में नायिका के रूप में अभिनय किया। अब तक विभिन्न बैनर्स की करीब 45 फिल्मों में विभिन्न भूमिकाओं का सफलतापूर्वक निर्वाह।
विशेष : राजस्थानी सिनेमा में राजस्थान की श्री देवी के नाम से मशहूर। राजस्थानी फिल्मों में सबसे ज्यादा नायिका के रूप में अभिनय करने का रिकॉर्ड।
सम्मान-पुरस्कार
1. सन्  2000 में बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड, तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदान किया।
2. सन् 2007 में बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड, तत्कालीन राज्यपाल श्रीमती प्रतिभा पाटील ने प्रदान किया।
इन दिनों : अपने बैनर की नई फिल्म के निर्माण की तैयारियों में व्यस्त।

जगदीश व्यास

जन्म : 1936, जोधपुर में, निवास-बीकानेर।
पहली राजस्थानी फिल्म : बाबा सा री लाडली (1961)।
अब तक : 20 से अधिक राजस्थानी फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाओं का सफलतापूर्वक निर्वाह।
विशेष : 40 साल से चरित्र अभिनेता के रूप में सक्रिय, राजस्थानी सिनेमा की सही मायने में पहली फिल्म कही जाने वाली फिल्म बाबा सा री लाडली से शुरू हुई अभिनय यात्रा अब तक अनवरत जारी। राजस्थानी फिल्मों की शुरुआत से वर्तमान तक अभिनय करने वाले जीवित अभिनेताओं में से एक।
इन दिनों : अपने बैनर की नई फिल्म के निर्माण की तैयारियों में व्यस्त।

राजस्थानी सिनेमा मेरा पहला प्यार

फ्लाइट इंजीनियर संदीप वैष्णव ने अब तक नौ राजस्थानी फिल्में बनाई हैं और दसवीं फिल्म निर्माणाधीन हैं। अगर आंकड़ों के हिसाब से देखें तो सबसे ज्यादा राजस्थानी फिल्में इन्होंने ही बनाई हैं शिवराज गूजर
राजस्थानी सिनेमा को कई निर्माता-निर्देशकों ने अपनी औलाद की तरह पाला पोसा है। कई तरह की परेशानियों के बावजूद वे नहीं टूटे और आज भी उसे जिंदा रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि अड़सठ साल में 110 या 111 फिल्मों का आंकड़ा कोई उत्साहजनक नहीं है, लेकिन यह क्या कम है कि इतनी फिल्में तो राजस्थानी में बनी। ऐसे ही लोगों के दम से आज राजस्थानी सिनेमा अपनी पहचान कायम रख पाया है। इन्हीं लोगों में से एक हैं-संदीप वैष्णव।
फ्लाइट इंजीनियर संदीप वैष्णव ने अब तक नौ राजस्थानी फिल्में बनाई हैं और दसवीं फिल्म निर्माणाधीन हैं। अगर आंकड़ों के हिसाब से देखें तो सबसे ज्यादा राजस्थानी फिल्में इन्होंने ही बनाई हैं। पाली जिले की मारवाड़ जक्शन तहसील के धनला गांव के इस युवा ने थारी म्हारी  फिल्म से राजस्थानी फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद इन्होंने कभी मुड़कर पीछे नहीं देखा। कई तरह की परेशानियां भी आईं, मगर ये डिगे नहीं। …

Recent in Sports