पंद्रह बार मार खाई तब रियलिटी आई

राजस्थानी फिल्मों में एक नया हीरो एंट्री मार रहा है। अमित तंवर। जोधपुर का यह छोरा निर्देशक प्रभुदयाल मीणा की फिल्म रुकमा राजस्थानी से डेब्यू करने जा रहा है। तंवर ने हाल ही राजस्थानी सिनेमा डॉट कॉम से शेयर किए अपने अनुभव।                                                         -शिवराज गूजर



यह फिल्म आपको कैसे मिली?
निर्देशक प्रभुदयाल मीणा मेरे मित्र है। उन्होंने मेरी शो रील भी देखी हुूई थी। जब उन्होंने रुकमा राजस्थानी बनाने का प्लान किया तो सबसे पहले मेरा ही नाम उनके दिमाग में आया। उन्होंने मुझसे बात की। उस वक्त मैं सावधान इंडिया की शूटिंग कर रहा था। स्टोरी सुनते ही मैंने हां कह दी। इस तरह यह फिल्म मुझे मिल गई।

क्या रोल है इस फिल्म में आपका?

इस फिल्म में मैंने रुकमा के पति का रोल किया है। एक ऐसे आदमी का रोल जो नामर्द है। अपनी नामर्दगी को छिपाने के लिए जो अपनी पत्नी पर अत्याचार करता है।

कितना अलग है इस फिल्म का किरदार अमित से?

हंड्रेड परसेंट अलग है। रुकमा का पति अत्याचारी है। औरतों की बिल्कुल रेस्पेक्ट नहीं करता। मैं अत्याचारी नहीं हूं और मैं लड़कियों की भी बहुत रेस्पेक्ट करता हूं।

क्या स्पेशल तैयारी की इस रोल के लिए?

यह रोल मेरे लिए बहुत टफ था। मैंने गांव नहीं देखा था तो मुझे पता नहीं था कि गांव वाले कैसे रहते हैं। कैसे उठते--, बैठते हैं और चलते हैं। उनका पहनावा और उनके बोलने का लहजा सब मेरे लिये अजनबी था। इन सब को आॅब्जर्व करने में मेरे डाइरेक्टर ने मेरी काफी मदद की। मैंने भी इमेजिन किया। नेट पर सर्च करके भी मैंने काफी कुछ पढ़ा जो मेरे लिए काफी मददगार रहा। एक गांव वाले का जीवन जीना, परदे पर ही सही मेरे लिए काफी एक्साइटिंग रहा।

इस फिल्म की अपनी को स्टार के बारे में क्या कहेंगे?

शी इज नाइस गर्ल । साथ ही बहुत अच्छी एक्ट्रेस भी है। शूट के दौरान हम इतने कम्फर्ट थे कि कभी लगा ही नहीं कि हम एक्टिंग कर रहे हैं। आप जब फिल्म देखेंगे तो आपको यह कैमिस्ट्री देखने को मिलेगी एकदम नेचुरल एक्टिंग के रूप में।

कोई ऐसा पल जो शूटिंग के बाद भी याद रहा हो। गुदगुदाता रहा हो?

ललिता द्वारा मुझे पीटने का सीन याद आता है तो मेरी अब भी हालत खराब हो जाती है। उस सीन में ललिता को मुझे मारना था। उसने मुझे रीयल में ही पीट दिया। मैं चुप रहा, चलो कोई नहीं सीन तो हो गया। तभी डाइरेक्टर सर की आवाज आई वन मोर। मैं तो शॉक्ड रह गया। मतलब एक बार और पिटना पड़ेगा वो भी रीयल का। ललिता ने फिर पीटा। डाइरेक्टर सर ने फिर कहा वन मोर। फिर पिटाईÞ, फिर वन मोर। बीच बीच में शूटिंग देखने आए गांव वालों के पंच। अरे ई छोरा ने तो सच में ही ठोक दियो। पंद्रह बार, जी हां पंद्रह बार ऐसा हुआ। मैं पिट-पिट कर एक दम लाल हो गया था। डाइरेक्टर सर ने ओके कहा तो मेरी जान में जान आई।

कौन- कौन से प्रोजक्ट पाइप लाइन में हैं?

दो राजस्थानी प्रोजक्ट पर बात चल रही है। अभी डेट फाइनल नहीं हुई है। उम्मीद है जल्द ही हो जाएगी। एक हिंदी फिल्म को लेकर भी बात हुई है, पर अभी उसमें वक्त लगेगा।

कोई हीरोइन जिसके साथ काम करना आपका ड्रीम हो?

काजोल। कोजोल के साथ काम करना मेरा ड्रीम है। वो जब एक्टिंग करती हैं तो ऐसी नेचुरल होती हैं कि उन पर से नजर नहीं हटतीं। वो वही लगती हैं, जो किरदार वो निभा रही होती हैं।

राजस्थानी सिनेमा को आगे बढ़ाने के लिए आपके हिसाब से क्या किया जाना चाहिए?

राजसथान के लोगों को अपने सिनेमा को बचाने के लिए इसके सपोर्ट में आना पड़ेगा। जब इसके प्रति अपने लोगों में क्रेज होगा तो दूसरे लोग अपने आप सिनेमा तक खिंचे आएंगे। सिनेमा हॉल मालिकों को भी राजस्थानी फिल्मों को लगाना चाहिए। जब फिल्में सिनेमा हॉल में लगेंगी तो लोग जरूर देखने आएंगे।
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