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Tuesday, January 13, 2015

फिल्में मेरा पहला प्यार, सीरियल सिर्फ मां के लिए

चूंदड़ी ओढ़ासी म्हारो बीर और टांको भिड़ग्यो जैसी राजस्थानी फिल्मों के हीरो सचिन चौबे ने लंबे समय बाद एक बार फिर से छोटे परदे की ओर रुख किया है। वे वी चैनल के नये शो मिलियन डॉलर गर्ल में नजर आएंगे। आरक्षण जैसी हिंदी फिल्म में छोटे से रोल से शुरुआत कर हीरो तक के सफर में सचिन की मेहनत और उनके काम के प्रति समर्पण साफ नजर आता है। टीवी के साथ ही वे हिंदी और राजस्थानी फिल्मों में भी बराबर सक्रिय हैं। नये धारावाहिक में अपने किरदार और आने वाले प्रोजेक्ट्स पर खुलकर बोले सचिन।   


शिवराज गूजर
  • फिल्म और धारावाहिक में क्या फर्क लगता है।
    सीरियल्स में आपका लुकटेस्ट होता है। आप लुक में फिट बैठते हैं तो एक दिन आपको बुला लिया जाता है और सब किरदारों से परिचित करवा दिया जाता है। आपको बता दिया जाता है कि यह आपके पापा हैं और यह आपकी मम्मी। यह भाई-बहन और यह आपकी गर्लफ्रेंड। बस अब आपको सेट पर आना है। मेकअप करवाना है और रिलेशन के अनुरूप केरेक्टर से बिहेव करते हुए संवाद बोलना है। कुछ उन्नीस-बीस हुआ भी तो संभालने में आ जाता है। एक ही रोल को लंबे समय तक जीते-जीते बोरियत सी होने लगती है। फिल्म में इससे अलग होता है आप कुछ ही समय एक किरदार के साथ जीते हो वो भी उसके अलग-अलग शेड्स के साथ। दो घंटे में जीवन का हर रंग उसमें आ जाता है।
  • फिल्में और सीरियल में से किसी एक को चुनना पड़े तो?
    फिल्म। कोई कन्फ्यूजन नहीं। मैं सिर्फ और सिर्फ सिनेमा करना चाहता हूं। हां! क्राइम पेट्रोल और सावधान इंडिया जैसे एपिसोडिक सीरियल जरूर करना चाहूंगा। ये आर्टिस्ट को कुछ नया देते हैं, क्यों कि इनमें हर बार एक नई कहानी होती है और एक नई भूमिका।
  • फिर आपने यह धारावाहिक क्यों स्वीकार कर लिया?
    यह धारावाहिक मैंने अपनी मां की इच्छा पूरी करने के लिए किया। वे हमेशा कहती हैं ‘बेटा तू इतनी फिल्में करता है, फिर भी टीवी पर तो दिखाई ही नहीं देता। मैं चाहती हूं कि मैं घर पर काम करते भी अपने बेटे को टेलीविजन पर देख पाऊं।’ मां ने फिर यही ख्वाहिश दोहराई, उसी समय इस धारावाहिक का आॅफर आया। रोल भी अच्छा था और मा की इच्छा भी तो मैंने यह स्वीकार कर लिया। अब इसे करके काफी मजा भी आ रहा है, क्योंकि यह किेरदार खूब मजेदार है।
  • मिलियन डॉलर गर्ल में आपका क्या किरदार है?
    मैं इसमें महेश का किरदार कर रहा हूं। यह एक ऐसे एनआरआई विराट ठाकुर का पीए है जो बनारस में पावरलूम का उद्योग लगाने आया है। यहां के बारे में कुछ भी पता नहीं होने के कारण मैं उन्हें हर अच्छे-बुरे से अवगत कराता हूं। यहां तक कि अगर मुझे कोई काम गलत लगता है तो मैं हां में हां मिलाने के बजाय उन्हें समझाता हूं। उसके आगे-पीछे का सच समझाता हूं। वो मेरा कहा मानते भी हैं। धारावाहिक मैनली फीमेल बेस्ड है पर मेरी भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण है। मिलियन डॉलर गर्ल एक तरह से झोलझाल करने वाली लड़की है, जिससे बचने के लिए भी मैं उन्हें सचेत करता रहता हूं।
  • महेश और सचिन में कितनी समानता है?
    महेश मुझसे अलग भी है और कुछ-कुछ मेरे जैसा भी। अलग इस तरह कि वो रोजाना आॅफिस जाता है, पर मैं कभी आॅफिस नहीं गया।  मुझसे उसके जितना काम नहीं हो सकता। हर समय बॉस के साथ रहना, बड़ा अजीब सा लगता है। समान इस मायने में कि पिताजी के पुलिस में होने के कारण घर का वातावरण काफी अनुशासित है और इसका पूरा असर मुझ पर है। महेश भी ऐसा ही है। अनुशासन में रहने वाला। वो भी शांत और डीसेंट बंदा है और मैं...थेड़ा रुक कर शरमाते हुए...अब अपनी मैं खुद तो क्या तारीफ करूं। आप समझ ही गए होंगे...कहते हुए खिलखिलाकर हंस पड़ते हैं।
  • आपके को-स्टार और डायरेक्टर के बारे में कुछ कहेंगे।
    बहुत ही कॉपरेटिव हैं। मैं जब सेट पर आया तो सबका बिहेवियर इतना अच्छा था कि मुझे कुछ भी अजनबी लगा। धारावाहिक के मुख्य किरदार सारमी काजमी और विक्रम सिंह दोनों ही बहुत अच्छे हैं और पूरा सहयोग करते हैं। खासकर निर्देशक इकबाल। पूरी यूनिट में सबसे बढ़िया। कुछ भी समझ में नहीं आए तो सीधा जाकर पूछ लो। गुस्सा होने के बजाय पूरा समझाते हैं। एक्टर को पूरी फ्रीडम देते हैं किरदार में डूबने की। उसकी तैयारी को नजरअंदाज नहीं करते, बल्कि उसे ध्यान से देखते हैं और सही लगने पर उसे काम में लेने भी देते हैं। कमी लगने पर उसे सुधारते हैं और किरदार का सही मूड बताते हैं। एक-दो बार नहीं भी कर पाओ तो गुस्सा नहीं होते, बल्कि आराम से उसकी परेशानी सुनकर उसे दूर करते हैं। जब मैंने उन्हें बताया कि बनारस में चौबे लोग काफी हैं और मैं भी चौबे हूं। ऐसे में मेरे किरदार के नाम के आगे भी चौबे लगा दिया जाए तो लोग जल्दी स्वीकार कर लेंगे। उन्होंने मेरी बात मानी और महेश को महेश चौबे कर दिया। हालांकि, पूरे धारावाहिक में बहुत कम पूरा नाम बोला जाएगा, लेकिन उन्होंने मेरी बात रखी यह मेरे लिए काफी बड़ी बात है।
  • शूटिंग के दौरान कोई यादगार पल?
    एक नहीं कई ऐसे पल हैं, पर सबसे ज्यादा यादगार है म्यूजिक रिलीज के दिन का वाकया। उस दिन मुझे पार्टी ब्वॉय का खिताब मिला, यह मेरे लिए बहुत खुशी वाला पल था। हुआ यूं कि म्यूजिक रिलीज का कार्यक्रम था और कोई स्टेज पर आ ही नहीं रहा था। थोड़े इंतजार के बाद जब कोई स्टेज पर नहीं जाता दिखा तो मैं गया और डांस करने लगा। इससे सबकी हिचक खुल गई और सबने जमकर मस्ती की। उस वक्त सबने कहा यार यह दिखने में ही डीसेंट है, अंदर से तो यह पार्टी ब्वॉय है। फुल मस्ती करने वाला। मैं काफी खुश था, क्योंकि मैं अट्रेक्शन आॅफ इवेंट हो गया था।
  • ऐसा किरदार जिसे जिंदगी में एक बार आप निभाना चाहते हों?  आपका ड्रीम रोल।
    शूल में मनोज वाजपेयी ने जो किरदार किया है, मौका मिले तो मैं उसे जीना चाहता हूं परदे पर। वह किरदार मेरे दिल के बहुत करीब है। मनोज वाजपेयी ने उसे इतने अच्छे ढंग से निभाया है कि आप उसके साथ जीने लग जाते हैं। वो खुश होता है तो आपके चेहरे पर हंसी आती है और वो दुखी होता है तो आपकी आंखों में आंसू।
  • कौन-कौन से प्रोजेक्ट पाइप लाइन में हैं?
    मेरी एक फिल्म जल्द ही शुरू हो रही है मुंबई एमएमएस। इसमें मैं मैन लीड कर रहा हूं। देखो मुंबई रियल लाइफ और फिल्मी अंदाज की शूटिंग पूरी हो चुकी हैं। ये जल्द ही रिलीज होंगी। एक राजस्थानी फिल्म मैंने हाल ही साइन की है और दो की बात चल रही है। सब कुछ ठीक रहा तो ये दोनों भी इसी साल शुरू हो जाएंगी।
  • आप राजस्थानी फिल्मों के हीरो हैं। यहां के सिनेमा के लिए कुछ कहना चाहेंगे?
    राजस्थानी सिनेमा ने मुझे पहचान दी है, यह मैं कभी नहीं भूल सकता। यहां अच्छी फिल्में बन रही है। मैं चाहता हूं कि मेकर और बेहतर फिल्में बनाएं और लोगों की इस धारणा को तोड़ें कि राजस्थानी में अच्छी फिल्में नहीं बनती।  यह धारणा टूटेगी तो लोग सिनेमाघर तक जरूर आएंगे। साथ ही हमें उन दर्शकों को अपनी फिल्मों से जोड़ना चाहिए जो दूर गांवों में रहते हैं। सही मायने में कहा जाए तो वही हमारे सच्चे दर्शक हैं। एक कमी जो मुझे यहां खलती है वो यह है कि हमारे यहां हीरो हैं पर स्टार नहीं हैं। ऐसे स्टार जिनके नाम से दर्शक सिनेमाघर तक खिंचा चला आए। इसलिए मेरे हिसाब से यहां ऐसे स्टार्स की जरूरत है जो इस सिनेमा को ऊंचाई दे सकें। मुझे पता है वो स्टार हममें ही हैं, बस उनके बाहर आने की देर है।

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