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जल्द ही मिल जाएगा राजस्थानी भाषा को दर्जा

विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थानी फिल्म फेस्टिवल के समापन समारोह में कहा कि उन्होंने हाल ही में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलवाने का आग्रह किया है

जयपुर. राजस्थानी फिल्मों के प्रोत्साहन के लिए सब्सिडी और सिनेमाघरों में प्रदर्शन से पहले राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए मांग करनी होगी। जब तक भाषा को ही दर्जा नहीं मिलेगा, हम किसी भाषायी सिनेमा को आगे बढ़ाने की बात कैसे करेंगे। मिलकर मान्यता के लिए एक मुहिम शुरू करें। यह कहना है कि राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत का। राजस्थानी फिल्म महोत्सव के समापन समारोह के मौके पर उन्होंने कहा कि भाषा के लिए हमें स्वयं खड़ा होना होगा। मैंने हाल ही राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से भाषा की मान्यता अधिकार के लिए निवेदन किया है। लगता है हमें जल्द ही हमारा अधिकार मिल जाएगा। दूरदर्शन जयपुर के डायरेक्टर आर.पी. मीणा ने कहा कि यदि 24 घंटे सेटेलाइट का अधिकार मिल जाए तो रोज एक राजस्थानी कार्यक्रम शुरू किया जा सकता है। महोत्सव जेकेके जयपुर, दूरदर्शन जयपुर, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग जयपुर और राजस्थानी एसोसिएशन की ओर से आयोजित किया गया। अभिनेता शिरीष कुमार निर्देशित ‘लाडो मरुधरा की शान’ फिल्म के ओडियो संगीत का विमोचन हुआ।
अब मिलेगा मौका
चिल्ड्रन फिल्म सोसायटी की ओर से बाल फिल्म निर्माण, तीन दिवसीय पटकथा लेखन, तीन दिवसीय फिल्म कैमरा संचालन, फिल्मी नृत्य, रूप सज्जा, फिल्मी गायन और राष्ट्रीय रंगमंच कार्यशाला जैसे विषयों पर राजस्थानी भाषा में कार्यशालाएं होंगी। जेकेके में अब फिल्म प्रदर्शन! : राजस्थानी एसोसिएशन के अध्यक्ष के.सी. मालू ने कहा कि आज ‘सुपातर बीनणी’ का शो हाउसफुल रहा। इससे लगता है कि भाषायी फिल्मों के दर्शकों की कमी नहीं है। मैं चाहता हूं कि जेकेके में महीने में एक बार राजस्थानी फिल्म का प्रदर्शन हो। इसके जवाब में जेकेके के महानिदेशक हरसहाय मीणा ने कहा, ये हो सकता है। इस पर विचार किया जाएगा।
शो हाउसफुल
महोत्सव में तीन दिनों तक 6 फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। अंतिम दिन 1981 में शिरीष कुमार अभिनीत फिल्म ‘सुपात्तर बीनणी’ का शो हाउसफुल रहा। 100 से अधिक दर्शकों ने खड़े होकर फिल्म देखी। शाम को ‘भोमली’ में भी वही हाल रहा। महोत्सव में ‘भोभर’, ‘म्हारी प्यारी चनणा’, ‘डूंगर रो भेद’, ‘बाबा रामदेव’ और ‘पंछीड़ा’ जैसी फिल्मों का प्रदर्शन हुआ।

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1942
1 नजराना
1961
2 बाबासा री लाडली
1963

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फिल्म के प्रोड्यूसर मनोज यादव व प्रजेंटर अनिल यादव ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि लोगों को यह फिल्म जरूर पसंद आएगी। फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे अभिनेता श्रवण सागर ने कहा कि यह फिल्म उनके दिन के बहुत करीब है। इसमें मेरा किरदार मेरे अब तक निभाए किरदारों से एकदम अलग है। इसके लिए मुझे गाड़िया लुहारों के रहन-सहन, उनके उठने-बैठन और बात करने का तरीका सीखने के लिए काफी तैयारी करनी पड़ी। मैं उन लोगों से मिला भी। उनके बीच रहा भी। इस दौरान मैंने देखा कि कितनी विपरीत परिस्थितियों में वे जीवन जी रहे हैं। थोड़ी परेशानी तो हुई, लेकिन इस दौरान का अनुभव शंखनाद में निभाई गई भूमिका में रम जाने में बहुत मददगार रहा। इस मौके पर बिजनेसमैन अरुण गोयल, विकास पोद्दार और अशोक प्रजापति भी मौजूद रहे।

फिल्म में श्रवण सागर ,संजना सेन, सजल गोयल ,अथर्व श्रीवास्तव ,रॉकी संतोष, गोविंद …

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