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आभार, थे म्हांने पहचाण दी

जवाहर कला केंद्र में शुरू हुआ राजस्थानी फिल्म फेस्टिवल, फिल्मकारों ने एक स्वर में की आयोजन की सराहना, विमर्श के दौरान बताई अपनी समस्याएं और सुझाए समाधान
जयपुर. राजस्थानी भाषा और सिनेमा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार से जवाहर कला केन्द्र में तीन दिवसीय राजस्थानी फिल्म महोत्सव शुरू हुआ। इसमें शामिल होने आए सभी फिल्मकारों ने मुक्तकंठ से इस आयोजन की तारीफ करते हुए इसे एक अच्छी शुरुआत बताया। उनका कहना था कि इससे राजस्थानी सिनेमा को एक व्यापक पहचान मिलेगी।
       समारोह का उद्घाटन राजश्री प्रोडक्शन के निर्माता कमल बडज़ात्या ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर जवाहर कला केन्द्र, जयपुर के महानिदेशक हर सहाय मीणा, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, जयपुर के आयुक्त एवं शासन सचिव कुंजीलाल मीणा, दूरदर्शन केन्द्र, जयपुर के निदेशक आर.पी. मीणा एवं राजस्थानी एसोशियेशन के अध्यक्ष के.सी. मालू भी मौजूद थे। इसके बाद राजस्थानी फिल्म सम्भावनाएं विषय पर विमर्श किया गया। विमर्श के प्रस्तोता सिने जर्नलिस्ट श्याम माथुर थे। वीणा कैसेट्स के निदेशक केसी मालू ने समारोह के दौरान होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए विमर्श की शुरुआत की। सुपातर बीनणी के अभिनेता शिरीष कुमार, महानिदेशक हरसहाय मीणा, के.सी. मालू, निर्माता-निर्देशक के.सी. बोकडिय़ा ने विचार रखे। 
प्यार लागी भोभर व म्हारी चनणा
महोत्सव के प्रथम दिन शुक्रवार को गजेन्द्र सिंह क्षोत्रिय निर्देशित भोभरÓ व सुप्रसिद्ध सिल्वर जुबली मना चुकी फिल्म म्हारी प्यारी चनणा के प्रदर्शन किया गया। दोनों ही फिल्मों को दर्शकों का बहुत अच्छा रेस्पांस मिला। बीच-बीच में बज रही तालियां दर्शकों के फिल्मों से जुड़ाव को बयां कर रही थीं।
सफर पर एक नजर
महोत्सव के उदघाटन सत्र में राजस्थानी फिल्मों के प्रारम्भ वर्ष 1942 से अब तक लगभग सात दशकों के सफर की  जानकारी ऑडियो-विडियो के माध्यम से दी गई। यह प्रस्तुति राजेन्द्र गुप्ता ने तैयार की गई। वहीं फिल्मों के प्रारम्भ वर्ष 1942 से अब तक के सफर में बनी विभिन्न राजस्थानी फिल्मों से सम्बन्धित छायाचित्रों एवं पोस्टर्स की प्रदर्शनी भी लगाई गई है।
सरकार का सहयोग मिल तो जी उठेगा सिनेमा : शिरीष कुमार
लेखक निर्देशक व अभिनेता शिरीष कुमार ने कहा कि हमारा सिनेमा कैंसर के मरीज की तरह है। अगर सरकार का सहयोग मिलेगा तो इस मरीज में जीने की ललक पैदा होगी और यह फिर से जी उठेगा। ऐसा नही है कि सरकार ने हमारी पीड़ा नहीं समझी। समझी, लेकिन केंसर के मरीज को जुकाम का मरीज समझकर ट्रीट किया। सरकार अनुदान की राशि 30 लाख रुपए करे। गुणवत्ता के आधार पर 50 लाख रुपए तक की सीमा रखी जाए।
बड़े निर्माता आगे आएं: श्याम सुंदर जालानी
फिल्म वितरक व निर्माता श्याम सुंदर जालानी ने राजस्थानी फिल्मों को दर्शक नहीं मिलने के मुद्दे पर कहा कि जब बड़ निर्माता-निर्देशक राजस्थानी फिल्में बनाने के लिए आगे आएंगे तो उनकी फिल्मों को देखने दर्शक जरूर आएंगे। इसके लिए उन्होंने राजश्री प्रोडक्शन, केसी बोकाडिय़ा जैसे निर्माताओं से आगे आने का अग्रह किया।
लोकेशन किराए में भी मिले छूट : संदीप वैष्णव
निर्देशक संदीप वैष्णव ने कहा कि हम जब राजस्थानी फिल्म की शूटिंग के लिए लोकशन की अनुमति लेने जाते हैं तो हमसे भी वही राशि मांगी जाती है जो बॉलीवुड वालों से मांगी जाती है। उनका बजट करोड़ों में होता है, इसलिए उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। हम इतना बोझ नहीं उठा पाते। अनुदान के साथ ही लोकेशन के किराए में भी राजस्थानी फिल्म बनाने वालों को छूट मिलनी चाहिए। उन्होंने फिल्म निर्माता और वितरक श्याम सुंदर जालानी जी की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सरकारी सहयोग मिलेगा तभी बड़े निर्माता निर्देशक आगे आएंगे।
30 लाख रुपए मिले अनुदान : कमल बडज़ात्या
निर्माता कमल बडज़ात्या ने कहा कि राजस्थान सरकार फिल्मों की सब्सिडी 5 लाख से बढ़ाकर 30 लाख रूपए करे। राजस्थानी फिल्म निर्माता निर्देशक व्यवसायिक दृष्टिकोण से फिल्म बनाए। प्रदेश के कलाकारों को शूटिंग करने के लिए जगह नि:शुल्क उपलब्ध करववाए। इस अवसर पर सूचना वं जन सम्पर्क विभाग के आयुक्त एवं शासन सचिव कुंजीलाल मीणा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहां कि प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों की कई बोलियां है,  पर भाषा केवल एक है वह है राजस्थानी। इसके साथ हमें लगाव रखते हुए इसके प्रोत्साहन के प्रयास करने है। यदि राजस्थानी फिल्मों को यहां के दर्शक देखना शुरू कर दे तो फिल्में अपने आप ही बनने लगेंगी।
तकनीक को लेकर आज होगी चर्चा
शनिवार को सुबह 11 बजे रंगायन सभागार जेकेके में फिल्म डूंगर रो भेद का प्रदर्शन होगा। दोपहर 3 बजे फिल्म बाबा रामदेव का प्रदर्शन किया जायेगा। 11.30 बजे राजस्थानी फिल्मों का तकनीकी पक्ष और दोपहर में 3.30 बजे राजस्थानी फिल्मों का गीत-संगीत विषय पर विमर्श किया जायेगा। इस दौरान निर्माता-निर्देशक के.सी बोकाडिया एवं महेन्द्र धारीवाल भी मौजूद रहेंगे।

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अब तक रिलीज राजस्थानी फिल्में

1942
1 नजराना
1961
2 बाबासा री लाडली
1963

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फिल्म के प्रोड्यूसर मनोज यादव व प्रजेंटर अनिल यादव ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि लोगों को यह फिल्म जरूर पसंद आएगी। फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रहे अभिनेता श्रवण सागर ने कहा कि यह फिल्म उनके दिन के बहुत करीब है। इसमें मेरा किरदार मेरे अब तक निभाए किरदारों से एकदम अलग है। इसके लिए मुझे गाड़िया लुहारों के रहन-सहन, उनके उठने-बैठन और बात करने का तरीका सीखने के लिए काफी तैयारी करनी पड़ी। मैं उन लोगों से मिला भी। उनके बीच रहा भी। इस दौरान मैंने देखा कि कितनी विपरीत परिस्थितियों में वे जीवन जी रहे हैं। थोड़ी परेशानी तो हुई, लेकिन इस दौरान का अनुभव शंखनाद में निभाई गई भूमिका में रम जाने में बहुत मददगार रहा। इस मौके पर बिजनेसमैन अरुण गोयल, विकास पोद्दार और अशोक प्रजापति भी मौजूद रहे।

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