अब जयपुर में होगा राजस्थानी फिल्म फेस्टिवल

जवाहर कला केन्द्र जयपुर के रंगायन सभागार में 23 से 25 सितंबर तक होगा, नीलू, जगदीप, शिरीष कुमार जैसे राजस्थानी फिल्मों के कलाकारों की करीब 10 फिल्में दिखाई जाएंगी
सुरेन्द्र बगवाड़ा . जयपुर
यह पहला अवसर होगा जब जयपुर में राजस्थानी फिल्म फेस्टिवल होगा, वह भी सरकारी स्तर पर। तीन दिन तक चलने वाले इस फेस्टिवल में लगभग 10 फीचर फिल्में दिखाई जाएंगी। जवाहर कला केन्द्र और दूरदर्शन की ओर से 23 से 25 सितम्बर तक आयोजित होने वाले फेस्टिवल में बाई चाली सासरिए, सुपातर बीनणी और नानी बाई रो मायरो जैसी करीब 10 सुपरहिट फिल्में दिखाई जाएंगी। समारोह में नीलू, अरविंद कुमार, शिरीष कुमार, मूल चन्द्र सिंह, भरत नाटा, ललित सेन सहित अनेक कलाकारों के आने की संभावना है। वे प्रदर्शन के दौरान दर्शकों से रू-ब-रू होने के साथ 3 अलग-अलग सेशन के जरिए फिल्मों के प्रोत्साहन के बारे में चर्चा करेंगे। इसमें प्रमुख फिल्मों की नई तकनीकी, वर्तमान स्थिति, भविष्य और प्रमोशन कैसे हो? विषय है। इसमें दर्शकों का प्रवेश नि:शुल्क होगा।
फिल्मों के प्रमोशन का प्रयास
राजस्थानी सिनेमा के विकास के लिए राजस्थान सरकार ने पहले भी 5 लाख की सब्सिडी की शुरुआत की है। इससे राजस्थानी निर्माता-निर्देशकों को सहायता मिलेगी। जेकेके के महानिदेशक हरसहाय मीणा कहते हैं कि प्रयास अच्छे हैं। अब कलाकारों को भी आगे आना होगा।
फिर होंगे हाउसफुल
मोहन सिंह राठौड़ के निर्देशन में वर्ष 1988 में प्रदर्शित फिल्म 'बाई चाली सासरिएÓ दर्शकों को आकर्षित करेगी। यह फिल्म 100 दिन चली थी। अभिनेता जगदीप, ललिता पंवार, नीलू, अलंकार स्टारर यह एक बार फिर हाउसफुल का बोर्ड जरूर लगाएगी। 151 मिनट की इस फिल्म के गीत 'बाई चाली, बन्ना रे, रुपयों तो ले मैं, हिवड़ा रो हार, भोमली आईÓ हर जुबां पर अभी तक राज कर रहे हैं। इसके बाद इस फिल्म की रीमेक 'साजन का घरÓ जूही चावला और ऋषि कपूर पर 1994 में बनी थी। समारोह में इसके साथ ही शिरीष कुमार व नीलू की 'सुपातर बीनणीÓ और 'नानी बाई को मायरोÓ भी दिखाई जाएगी। वहीं चिल्ड्रन फिल्म सोसायटी की 1985 में बनी 'डूंगर रो भेड़Ó प्रमुख है। वहीं भोभर भी स्क्रीन पर हो सकती है।
अभी तक सिर्फ बॉलीवुड
जयपुर में अभी तक सिर्फ जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हिंदी, फ्रेंच और अंग्रेजी को प्राथमिकता दी गई। अगले साल एनिमेशन दिखाएंगे। इसके साथ चिल्ड्रन फिल्म सोसायटी की ओर से बाल फिल्म समारोह भी हो चुका है। पर अब जयपुर में पहली बार राजस्थानी फिल्म फेस्टिवल का प्रयास होने जा रहा है। इस प्रयास से राजस्थानी फिल्म कलाकारों को फिर से उभरने का अवसर मिलेगा। साथ ही यहां की फिल्म इंडस्ट्री को भी फिर से स्थापित होने का मौका मिलेगा।
जोधपुर में हुआ था पहला फेस्टिवल
पहली बार किसी संस्था की ओर वर्ष 1993 में जोधपुर में राजस्थानी फिल्म फेस्टिवल मनाया गया था। इसमें बॉलीवुड अभिनेता सुनील दत्त ने उपस्थिति दर्ज कराकर सिनेमा को नई पहचान देने का प्रयास किया था। इसके बाद से अभी तक कुछ नहीं हो पाया था, लेकिन जेकेके का यह प्रयास सराहनीय है। यह कहना है अभिनेता मोहन कटारिया का। वे कहते हैं बीच में बंद होने का कारण इस भाषा को मान्यता न मिलना था। अब प्रयास हो रहे हैं। कोशिश होगी कि सफलता मिले। इसमें सरकार को भी अहम भूमिका निभानी चाहिए।
आर्थिक प्रयास होने चाहिए
एक समारोह राजस्थानी भाषाई फिल्मों को जीवित नहीं रख सकता। सरकार को कलाकारों की मदद के लिए आर्थिक प्रयास करने चाहिए।
शिरीष कुमार, अभिनेता, सुपातर बीनणी
(source-citybhaskar,jaipur )

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